पुलवामा हमले से सबक, ऐसे हाईटेक होगी सुरक्षाबलों के काफिले की सुरक्षा

घाटी में जवानों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर 3 अहम चीजों को तत्काल प्रभाव से लैस किया जाएगा. पहली चीज 'मॉड्यूलर बैरियर' जिसको आसानी से कही भी इंस्टॉल और शिफ्ट किया जा सकता है. कितनी भी भारी गाड़ी चाहे जितनी तेजी से आ रही हो, इस बैरियर की मदद से तुरंत ये गाड़ी वहीं रुक जाएगी.

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जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 9:24 PM IST

पुलवामा में 14 फरवरी को CRPF के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय में लगातार बैठकों का दौर चलता रहा. जिसमें इस बात को लेकर माथापच्ची होती रही कि कैसे पुलवामा जैसे हमले होने से रोका जाए. गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इस घटना के बाद अब तक 8 उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, गृह सचिव, एनएसए अजीत डोभाल और अर्धसैनिक सुरक्षाबलों के प्रमुखों समेत आंतरिक सुरक्षा से जुड़े आला अधिकारियों से इस बाबत इनपुट लिए गए कि कैसे इस तरह के खतरों को टाला जाए.

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जिसका परिणाम ये रहा कि अब घाटी में सुरक्षा व्यवस्था के नए तरीके पर समीक्षा की जा रही है. इसमें महत्वपूर्ण एलीमेंट वो वाहन है, जिसमें जवानों को ट्रूप्स मूवमेंट के समय एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है. सूत्रों के मुताबिक इन वाहनों को और आधुनिक बनाने का फैसला लिया गया है.

गृह मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जितने भी वाहन घाटी में जवानों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे उन पर 3 अहम चीजों को तत्काल प्रभाव से आने वाले दिनों में लैस किया जाएगा. पहली चीज 'मॉड्यूलर बैरियर' जिसको आसानी से कही भी इंस्टॉल और शिफ्ट किया जा सकता है. कितनी भी तेजी से आ रही गाड़ी चाहे वो जितनी भी भारी हो, इस बैरियर की मदद से तुरंत ये गाड़ी वहीं रुक जाएगी. सुसाइड बॉम्बिंग वाहन को रोकने के लिए ये बहुत कारगार है. इन्हें मुख्य रास्ते की बजाय गलियों में लगाया जाएगा जो मुख्य सड़क से जुड़ी होती हैं,  क्योंकि पुलवामा हमला जो हुआ था उसमें भी गली से ही गाड़ी आई थी और काफिले से टकरा गई थी. घाटी के अहम रास्तों पर ऐसे बैरियर लगाने का बड़ा प्लान तैयार कर लिया गया है.

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दूसरा अहम उपकरण आई सेफ "लेजर डेजलर" है, यह डिवाइस लेजर तकनीक पर आधारित होती है. इस उपकरण को वाहन में मौजूद जवानों को दिया जाएगा. अगर सुरक्षाबलों को किसी गाड़ी पर शक होगा कि पीछे से जो गाड़ी आ रही है, ड्राइवर उनकी बात नहीं सुन रहा है तो इस लेजर डेजलर से उस ड्राइवर की आंख पर रोशनी दिखा सकते हैं, जिससे वो गाड़ी काफिले के पास ना लाए.

तीसरा उपकरण लॉन्ग रेंज "एकॉस्टिक डिवाइस" है, जिसके जरिए अगर सुरक्षाबलों को शक होता है कि उनके वाहन के नजदीक कोई संदिग्ध वाहन आता है तो वहउस वाहन की ओर इस डिवाइस को करके ऐलान करेंगे. सुरक्षाबलों की आवाज सीधे उस वाहन चालक के कानों तक पहुंचेगी. अगर कोई आम नागरिक पर भी सुरक्षाबलों को शक होता है तो उसको नुकसान नहीं होगा. सिर्फ आवाज के जरिए उसको रोकने की कोशिश की जाएगी.

गृह मंत्रालय में बैठकों के बाद इस बात पर सहमति बनी है कि काफिले के वाहनों को और ज्यादा एडवांस बनाया जाएगा. जिससे पुलवामा जैसे हमले को टाला जा सके. इसमें से मॉड्यूलर वाहन बैरियर थोड़ी मात्रा में घाटी में पहले से ही तैनात थे. लेकिन इस हमले के बाद अब उनकी तैनाती बहुत ज्यादा की जाएगी. किन-किन जगहों पर तैनात किया जाएगा यह बैरियर कौन सी यूनिट को दिया जाएगा इन सब पर अभी रणनीति बनाई जा रही है.

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