अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां पुलिस का मानना है कि कई अहम सच सिर्फ दस्तावेजों से नहीं, बल्कि आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने से सामने आएंगे. इसी कड़ी में अयोध्या पुलिस ने जेल में बंद अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
कंट्रोल रूम से गायब रहते थे कर्मचारी
जांच में सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कथित लापरवाही का आरोपियों ने पूरा फायदा उठाया. पुलिस के मुताबिक, कई बार कंट्रोल रूम में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं रहता था, जिससे उन पर नजर रखने वाला कोई नहीं होता था और चोरी करना उनके लिए आसान हो जाता था.
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि नौकरी मिलने के महज दो-तीन महीने बाद ही छह कर्मचारियों ने मिलकर चढ़ावे से रकम निकालनी शुरू कर दी थी. शुरुआत में वे 500 रुपये के एक-दो नोट कपड़ों में छिपाकर बाहर ले जाते थे. जब लंबे समय तक उनकी करतूत पकड़ी नहीं गई तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और धीरे-धीरे वे नोटों की गड्डियां तथा बाद में बड़ी रकम निकालने लगे.
चढ़ावा चोरों ने मानी 2 से 3 करोड़ चोरी की बात
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने सामूहिक रूप से करीब 2 से 3 करोड़ रुपये तक की कथित चोरी की बात स्वीकार की है. जांच एजेंसियों के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल सात आरोपियों ने अयोध्या समेत अन्य स्थानों पर संपत्तियां खरीदने में किया.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट ने चार और पांच जून के आसपास आरोपियों के ठिकानों से लगभग 79 लाख रुपये नकद और कुछ आभूषण बरामद कराए थे. गिरफ्तारी के बाद भी उनके पास से अतिरिक्त नकदी मिलने की जानकारी सामने आई है. बरामद जेवरों का सत्यापन कराया जा रहा है. यदि उनके वैध खरीद या उपहार में मिलने के प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें परिजनों को वापस किया जाएगा, अन्यथा उन्हें चोरी की संपत्ति मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
आशीष श्रीवास्तव