पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य ने उठाए नोटबंदी के क्रियान्वयन पर सवाल

इससे पहले नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था नोटबंदी से काला धन सफेद नहीं हुआ लेकिन ग्रे जरूर हो गया. देश में नकद लेनदेन में कमी आई है, जो नोटबंदी का असर है. 

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शमिका रवि, (फाइल फोटो- ट्वीटर) शमिका रवि, (फाइल फोटो- ट्वीटर)

विवेक पाठक

  • नई दिल्ली ,
  • 02 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नोटबंटी पर जारी ताजा रिपोर्ट पर अभी सियासी बवाल थमा भी नहीं था कि प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि ने नोटबंदी की प्रक्रिया को लागू करने के तरीके पर सवाल खड़ा कर दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में शमिका रवि ने कहा कि, नोटबंदी को लागू करने का तरीका निश्चित ही सवाल उठाने लायक है. जैसे कि हम 2,000 रुपये का नोट लाए. यह अपने ही आप ही इस तर्क को खारिज कर देता है कि बड़े मूल्य के नोट हटाए जाने हैं.

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हालांकि नोटबंदी के फायदे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, लेकिन क्या आपने यह गौर किया कि (नोटबंदी के बाद) कर अनुपालन बढ़ा है? आपको क्या लगता है कि यह क्यों हुआ होगा?

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 से देश में उच्च मूल्य के पुराने 1000 और 500 के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था. इसके स्थान पर 2,000 और 500 रुपये के नए नोट जारी किए गए. बाद में एक 200 रुपये का नोट भी जारी किया गया.

भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया आंकड़ों के अनुसार आठ नवंबर 2016 को देश में 15.41 लाख करोड़ रुपये के 1,000 और 500 रुपये के पुराने नोट चलन में थे, जिसमें से 15.31 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए.

रवि ने रीयल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स कानून को भी युक्तिसंगत बनाने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि कर प्रणाली को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए, विशेषकर रीयल एस्टेट क्षेत्र में. क्या जीएसटी को आगे और अधिक तर्कसंगत बनाया जा सकता है, मेरा मानना है कि ऐसा किया जा सकता है। कर अनुपालन का बोझ घटाया जाना चाहिए.

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रुपये के गिरते स्तर के मुद्दे पर रवि ने कहा कि रुपये की कमजोरी को देश की क्षमता में गिरावट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे टूटकर 71 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया था.

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