पाकिस्तान में आज 500 हिंदुओं का धर्म परिवर्तन, विस्थापितों से जुड़े संगठन का आरोप

लोक सीमांत संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा के अनुसार जो लोग पाकिस्तान छोड़ कर भारत आए थे, मगर किन्हीं कारणों से उन्हें वापस जाना पड़ा, उन परिवारों को खास तौर से टारगेट किया जा रहा है. पिछले 3 सालों में भारत में शरण लेने आए 1,379 हिंदुओं को पाकिस्तान लौटना पड़ा है. वहीं नए मामले में 500 हिंदुओं का धर्म जबरन धर्म परिवर्तन किया जा रहा है, इसमें कई लोग वे हैं जो हाल ही में भारत से डिपोर्ट हुए हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

अंकुर कुमार / शरत कुमार

  • जयपुर ,
  • 25 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 12:09 AM IST

राजस्थान बॉर्डर के पार पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदुओं की आबादी तेजी से खत्म की जा रही है. यहां हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. रविवार को भी एक मामला सामने आया है. पाकिस्तानी हिंदू विस्थापितों के लिए काम करने वाली संस्था लोक सीमांत संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा के अनुसार 500 हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है.

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लोक सीमांत संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा के अनुसार जो लोग पाकिस्तान छोड़ कर भारत आए थे, मगर किन्हीं कारणों से उन्हें वापस जाना पड़ा, उन परिवारों को खास तौर से टारगेट किया जा रहा है. पिछले 3 सालों में भारत में शरण लेने आए 1,379 हिंदुओं को पाकिस्तान लौटना पड़ा है. वहीं नए मामले में 500 हिंदुओं का धर्म जबरन धर्म परिवर्तन किया जा रहा है, इसमें कई लोग वे हैं जो हाल ही में भारत से डिपोर्ट हुए हैं.

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 25 मार्च को बड़े स्तर पर हिंदुओं को जबरन कबूल कराया जा रहा है. यहां 500 हिंदुओं के धर्म परिवर्तन के लिए पर्चे भी बांटे जा चुके हैं.  इनमें 5 अगस्त 17 को डिपोर्ट किए गए 80 वर्षीय चंदू, उसकी पत्नी धामी, बेटा भगवान, बहू धरमी और बच्चे धीरो, मूमल, जयराम व कविता भी शामिल हैं. राजस्थान हाईकोर्ट ने छुट्‌टी के दिन स्पेशल बेंच लगाकर इनके डिपोर्ट आदेश पर स्टे भी दे दिया था मगर आदेश तामील होता उससे चंद मिनट पहले उनकी ट्रेन पाकिस्तान सीमा में प्रवेश कर गई थी. अब इस परिवार पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जा रहा है.

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हिंदू सिंह सोढा का कहना है कि पाकिस्तान का . वहां धर्म बदलने की मजबूरी, यहां रोजी-रोटी और न जाने कब खदेड़ दिए जाने का खतरा हर समय मंडराता है. भारत सरकार विस्थापित हिंदुओं के पुनर्वास के नियम बनाती तो है, लेकिन  जिला स्तरों पर उनकी पालना नहीं होती. इसलिए जो लौट रहे हैं, उनके पास धर्म बदलने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है. कई संगठन कलमा पढ़ने वालों को रहने के लिए अफोर्डेबल घर, घरेलू सामान, दहेज का सामान, काम करने के लिए सिलाई मशीनें, नहरों से खेती करने के लिए साल भर पानी का प्रलोभन भी दे रहे हैं. थारपारकर व उमरकोट इलाकों में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले ज्यादा आ रहे हैं.

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