जल्लीकट्टू पर 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

पुनर्विचार करने से मना कर दिया.तमिलनाडु के कुछ निवासियों की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर रोक लगाई थी.

Advertisement
जल्लीकट्टू, सुप्रीम कोर्ट जल्लीकट्टू, सुप्रीम कोर्ट

अहमद अजीम

  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 3:37 PM IST

इस साल 22 जनवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर लगाई गई रोक पर पुनर्विचार करने से मना कर दिया.तमिलनाडु के कुछ निवासियों की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर रोक लगाई थी.

केंद्र सरकार ने हटाया था जल्लीकट्टू से प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को अधिसूचना जारी कर पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था. अधिसूचना में कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए थे. वेलफेयर बोर्ड, पीपुल फार एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स, बंगलुरु के एक एनजीओ और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में अधिसूचना को चुनौती दी थी. याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिसूचना पर रोक लगा दिया था.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट में फिर दायर हुई याचिका
एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. लेकिन कोर्ट के रूख को देखते हुए नहीं लगता की तमिलनाडु को इस मामले में कोई राहत मिलेगी.

23 अगस्त को होगी मामले की सुनवाई
जल्लीकट्टू यानी सांड़ों की दौड़ पर रोक के खिलाफ तमिलनाडू सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची. और सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार है,23 अगस्त को इस मामले पर अंतिम सुनवाई होगी, को नहीं टाला जाएगा. तमिलनाडू सरकार ने याचिका में परंपरा का हवाला दिया. इस पर जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा - इस दलील में दम नहीं. 1899 में 10 हज़ार से ज़्यादा बाल विवाह हुए. 12 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी हुई. क्या इसे परंपरा मान कर जारी रहने दिया जा सकता है? हमें सिर्फ ये देखना है कि ये खेल कानून और संविधान की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »