तीस्ता सीतलवाड़ को नहीं मिली SC से राहत, बिलकिस बानो रेप केस पर लगी याचिका भी खारिज

2002 के गुजरात के बिलकिस बानो रेप केस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने जांच में गड़बड़ी और सबूत छिपाने के दोषी करार पुलिस अफसर RS भगोरा, चार अन्य पुलिस अफसर और दो डॉक्टरों की याचिका खारिज कर दी है.

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सुप्रीम कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर) सुप्रीम कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अहमद अजीम

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले में चार्जशीट दायर हो चुकी है, इसलिए वो ट्रायल कोर्ट में ट्रायल फेस करें. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीस्ता के मामले को लेकर हाई कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बनेगी और ना ही उन्हें ट्रायल में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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दिसंबर 2005 का है मामला

आपको बता दें कि लूनावाड़ा सामूहिक कब्र खोदने का मामला 27 दिसंबर 2005 की उस घटना से संबंधित है, जिसमें छह लोगों ने सीजेपी के तत्कालीन समन्वयक रईस खान पठान के नेतृत्व में गुजरात के पंचमहल जिले में लूनावाड़ा में पनाम नदी की तलछटी में 28 अज्ञात शवों को कब्र से खोदकर निकाला था. बाद में कब्र खोदने वालों ने दावा किया कि वे शव पंधरवाड़ा नरसंहार के लापता पीड़ितों के थे और वे उनके रिश्तेदार थे. बाद में शवों की पहचान के लिए उनकी डीएनए जांच कराई गई और उसके बाद उन्होंने शवों को इस्लामिक परंपरा के अनुसार बाकायदा दफन किया गया. उस समय पठान ने कहा था कि उन्होंने सीतलवाड़ के कहने पर कब्रें खोदी थीं.

2002 के गुजरात के बिलकिस बानो रेप केस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने जांच में गड़बड़ी और सबूत छिपाने के दोषी करार पुलिस अफसर RS भगोरा, चार अन्य पुलिस अफसर और दो डॉक्टरों की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट के मुताबिक सभी की सजा बरकरार रहेगी.

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दोनों डॉक्टरों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने डॉक्टर होने के बावजूद पुलिस के कहने पर रिपोर्ट लिखी, ये आपने अपने पेशे के साथ सही नहीं किया.

पिछले साल उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने के मामले में केंद्र सरकार की याचिका पर 25 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट अंतिम सुनवाई करेगा. आपको याद दिला दें कि केंद्र ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती. दरअसल, हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया था.

केंद्र सरकार की ओर से आज कोर्ट में कहा गया कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना सही था या नहीं इस मुद्दे पर AG के के वेणुगोपाल बहस करेंगे. हरीश रावत की ओर से कहा गया कि दोबारा चुनाव हो चुके हैं सरकार बन चुकी है. अब ये मामला निष्प्रभावी हो गया है.

राष्ट्रपति शासन के साथ ही साथ 25 अक्टूबर को 9 बागी विधायकों की भी याचिका पर सुनवाई होगी. गौरतलब है कि पूर्व विधायकों ने खुद को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी है.

 

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