भारतीय राजनीति में मोदी जैसा कोई नहीं, सर्वे के ये आंकड़े गवाह

लोकप्रियता के इतिहास में यह भारत का नया अध्याय है. विश्वास और उम्मीद की चौहद्दियों के बीच से नेतृत्व का एक ऐसा अवतरण जिसने पुराने सारे मुहावरों को ध्वस्त कर दिया. आप सहमत हों या असहमत.

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नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी

अनुग्रह मिश्रा

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  • 18 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 6:09 PM IST

कहते हैं कोई नेता अपने आप में क्रांति नहीं होता, उसका काम क्रांति होता है. लेकिन प्रधानमंत्री ने इस धारणा को तोड़ दिया है. आजतक इंडिया टुडे कार्वी इनसाइट सर्वे के जो नतीजे आए हैं उनके सामने न कोई सवाल बचता है और न जवाब. सिवाए इसके कि मौजूदा भारतीय राजनीति में मोदी जैसा कोई नहीं.

लोकप्रियता के इतिहास में यह भारत का नया अध्याय है. विश्वास और उम्मीद की चौहद्दियों के बीच से नेतृत्व का एक ऐसा अवतरण जिसने पुराने सारे मुहावरों को ध्वस्त कर दिया. आप सहमत हों या असहमत. लेकिन यह सत्य भी है और तथ्य भी कि आज की तारीख में नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के आसमानी विस्तार के सामने दूसरे नेताओं की मौजूदगी उल्का पिंडों से ज्यादा की नहीं रह गई है. आजतक और इंडिया टुडे- कार्वी इनसाइट का यह सर्वे भारतीय राजनीति का नया प्रस्थान बिंदु हैं जहां से सत्ता और विपक्ष को अपनी-अपनी भूमिकाएं तय करनी है.

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19 राज्य, 97 संसदीय क्षेत्र, 194 विधानसभा क्षेत्र और 12178 लोगों पर हुए सर्वे ने कागज पर लिखकर बताया है कि कहने को कुछ भी कहा जाए लेकिन नरेंद्र मोदी अभी निष्टकंटक राज भोगेंगे. आज के हालात में वो अजेय हैं, अबाध हैं और अगाध हैं. आजतक कार्वी इनसाइट के सर्वे के मुताबिक नरेंद मोदी के सामने कोई नहीं, कहीं नहीं और किसी हिस्से में नहीं, वो राजनीति के एक ऐसे मैदान के योद्धा हैं जिसमें मुकाबले में उतरने वाली सेना का जोम आगे बढ़ने से पहले जवाब दे गया है.

हिंदुस्तान के 33 फीसदी लोगों ने कहा है कि नरेंद्र मोदी इतिहास के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं. इस सर्वे में निकलकर आया है कि दूर-दूर तक मोदी का कोई मुकाबला नहीं, न तो विपक्ष और न ही बीजेपी के भीतर से उन्हें कोई चुनौती देने वाला है.

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कार्वी इनसाइट सर्वे के नतीजे बताते हैं नरेंद्र मोदी का नेतृत्व विपक्ष के बचे खुचे धरातल को भी ध्वस्त करता जा रहा है. वो ऐसे नेता हैं बन चुके हैं जिसके सामने न तो कोई विरोध खड़ा है और न ही कोई चुनौती. बीजेपी के बड़े-बड़े नेता तक मोदी को चुनौती देने के लायक नहीं हैं. सर्वे के मुताबिक जनता ने जिनमें थोड़ी-बहुत संभावना देखी भी है वो शून्य से कुछ ही ज्यादा है, जैसे मोदी को चुनौती देने वालों में सबसे आगे हैं . लेकिन आदित्यनाथ को सिर्फ 13 फीसदी लोग इस लायक मानते हैं, शिवराज चौहान को 5 फीसद, अमित शाह को चार फीसद, वेंकैया नायडू को 3 फीसद, मोहन भागवत को 3 फीसद और देवेंद्र फड़नवीस को सिर्फ 2 फीसद लोग काबिल मानते हैं.

कार्वी इनसाइट सर्वे में जो सबसे हैरतअंगेज बात निकलकर आई है वो ये कि इस देश में बहुत बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है जो मोदी के जादू के सामने कुछ सोचने समझने की हालत में ही नहीं हैं, उन्हें नहीं पता कि अगर मोदी नहीं तो कौन. विकल्पहीनता के इस दौर में लोगों की कल्पनाएं जवाब दे गई हैं. उम्मीदें जवाब दे गई हैं और सोच की सीमाएं जवाब दे गई हैं. आजतक कार्वी के सर्वे में 24 फीसद लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं पता मोदी नहीं तो कौन? विकल्पों के मामले में ऐसी वीरानी कभी देखने को नहीं मिली.

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