तीन तलाक पर बोले खड़गे-हम बिल के साथ लेकिन स्थायी समिति जरूरी

कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सब इस बिल के साथ हैं लेकिन इस बिल में कुछ खामियां हैं जिन्हें दूर किए जाने की आवश्यकता है. खड़गे ने कहा कि इस बिल को स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए ताकि वह इस बिल से जुड़े पक्षों से बात कर उन खामियों को दूर कर एक पुख्ता कानून तैयार कर सके.

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तीन तलाक बिल को स्थायी कमेटी को भेजने की मांग तीन तलाक बिल को स्थायी कमेटी को भेजने की मांग

राम कृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 28 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

तीन तलाक को अपराध घोषित कर उसके लिए सजा के प्रावधान वाला बिल लोकसभा में पेश हो गया है. इस बिल को पेश करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसे वक्त की जरूरत बताया और तुरंत पास किए जाने पर जोर दिया, दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे ने पर सहमति जताई, लेकिन कहा कि इसे स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए ताकि इसकी खामियों को दूर किया जा सके.

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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पेश करते हुए कहा कि ये बिल किसी शरिया, धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है. ये मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और अधिकार के लिए है और इसे पूरे सदन को बिना किसी राजनीतिक मतभेद के, वोट बैंक की परवाह के पास किया जाना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि दिन ब दिन महिलाएं इसका शिकार बनती जा रही हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी देश में तीन तलाक के करीब सौ मामले सामने आए हैं.

रविशंकर प्रसाद की बात का जवाब देने खड़े हुए सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सब इस के साथ हैं, लेकिन इस बिल में कुछ खामियां हैं जिन्हें दूर किए जाने की आवश्यकता है. खड़गे ने कहा कि इस बिल को स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए, ताकि वह इस बिल से जुड़े पक्षों से बात कर उन खामियों को दूर कर एक पुख्ता कानून तैयार कर सके.

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खड़गे ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में क्यों है. भले ही हम स्थायी समिति को बिल के लिए महज 20 दिन या एक माह का समय दें लेकिन वो जरूरी है क्योंकि कई महत्वपूर्ण बिल स्थायी समिति को भेजे जाते हैं.

खड़गे की इस मांग पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ये बिल महज चार प्रावधानों का है. अगर कांग्रेस को कोई आपत्ति है तो वो बताए हम उनका समाधान करेंगे. अगर उसका कोई सुझाव है तो वो भी वो सामने रखे ताकि अगर जरूरी हो तो उसके मुताबिक बदलाव किए जाएं लेकिन जिस तरह हर रोज महिलाएं तीन तलाक का शिकार हो रही हैं उसे देखते हुए इसे स्थायी समिति में भेजकर इसमें देरी करना ठीक नहीं होगा.

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