लोकसभा से इंडियन मेडिकल काउंसिल बिल को मिली मंजूरी, ये हैं प्रावधान

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि देश को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का मिशन साफ है. आयुष्मान भारत के अंतर्गत बड़ी तादाद में लोगों को इलाज मिल रहा है. देश पीएम मोदी की अगुवाई में यूनिवर्सल हेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन (फोटो- LSTV) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन (फोटो- LSTV)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

लोकसभा से मंगलवार को इंडियन मेडिकल काउंसिल संशोधन विधेयक 2019 पारित कर दिया गया. इस बिल का मकसद देश में मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता लाना है. अब राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक दो साल की अवधि के लिए मेडिकल काउंसिल के आधिपत्य की इजाजत देगा, जिस दौरान एक बोर्ड ऑफ गवर्नर (BoG) मेडिकल एजुकेशन के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी नियामक संस्था को चलाएगा.

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यह विधेयक इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 में और संशोधन करने का प्रस्ताव रखता है. 16वीं लोकसभा में यह पारित नहीं हो पाया था. बिल को पेश करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि यह बिल लोकसभा से पारित हो चुका था लेकिन पिछले बार राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था. उन्होंने कहा कि संसद न चलने की वजह से यह अध्यादेश लाया गया है.

बोर्ड ने किया बेहतर काम

हर्षवर्धन ने लोकसभा में कहा कि बोर्ड ऑफ गवर्नर की ओर से पिछले 8 माह के भीतर 15 हजार ज्यादा MBBS की सीटें निकाली गईं साथ ही पहले से ज्यादा मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दी गई. उन्होंने कहा कि बोर्ड ने टीचरों की कमी को भी कम किया है, मिशन मोड में EWS कोटे को लागू करने का काम किया है. बोर्ड सिस्टम में पारदर्शिता लाने में सफल रहा, काउंसिल के खिलाफ होने वाले मुकदमों में भी कमी आई है.

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स्वास्थ्य ने सदन को बताया कि अभी आगे मेडिकल कमीशन बिल आएगा जिसमें ज्यादा विस्तार से नियमों को लागू किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि देश को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का मिशन साफ है. आयुष्मान भारत के अंतर्गत बड़ी तादाद में लोगों को इलाज मिल रहा है. देश पीएम मोदी की अगुवाई में यूनिवर्सल हेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

विपक्ष ने उठाए सवाल

मेडिकल काउंसिल संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आपको यह बिल अध्यादेश के रास्ते नहीं लाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की डॉक्टरों की काफी कमी है और इसकी वजह से गलत लोग फायदा उठा रहा हैं. कांग्रेस सांसद ने स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की भी मांग की.

बिल पर चर्चा के दौरान बसपा सांसद दानिश अली ने कहा कि सरकार चुनी हुई संस्था की जगह नामित बोर्ड ला रही है, सरकार मेडिकल एजुकेशन की संस्था को भी हथियाना चाहती है. डॉक्टरों से इस बारे में चर्चा कर नई संस्था का गठन किया जाना चाहिए था. 

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