कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का कार्यकाल पूरा

पश्चिम बंगाल सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का तबादला कर दिया है. उन्होंने ने कमिश्नर के तौर पर अपना 3 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया था.

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राजीव कुमार (फाइल फोटो-पीटीआई) राजीव कुमार (फाइल फोटो-पीटीआई)

मनोज्ञा लोइवाल

  • कोलकाता,
  • 18 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

शारदा चिट फंड घोटाले की वजह से चर्चा में आए कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का कार्यकाल पूरा हो गया है. अब उनकी जगह नए पुलिस कमिश्नर की खोज की जा रही है. ममता सरकार ने कुछ और प्रशासनिक फेरबदल किए हैं. कोलकाता पुलिस के अधीन आने वाली स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) अब एसटीएफ बंगाल कही जाएगी. जावेद शमीम को एसटीएफ बंगाल का प्रमुख बनाया गया है. इसके साथ ही एसएन गुप्ता को एडीजी लॉ एण्ड ऑर्डर नियुक्त किया गया है.

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राजीव कुमार का नाम हाल के दिनों में तब चर्चा मे आया था जब शारदा चिट फंड घोटाला मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम पूछताछ के लिए कोलकाता पहुंची थी. लेकिन कोलकाता पुलिस ने सीबीआई को उनके घर में दाखिल होने से रोक दिया और सीबीआई के जांच अधिकारियों को हिरासत में ले लिया. हालांकि बाद में गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को छोड़ दिया. उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीबीआई के इस एक्शन के लिए केंद्र द्वारा संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए दो दिन के धरने पर बैठ गई.

दरअसल ममता सरकार ने राजीव कुमार को शारदा चिट फंड घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी का प्रमुख बनाया था. सीबीआई का आरोप था कि राजीव कुमार ने घोटाले से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने राजीव कुमार पर न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय की राजधानी शिलांग में सीबीआई को राजीव कुमार से पूछताछ की इजाजत की थी. लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस दौरान सीबीआई राजीव कुमार को गिरफ्तार नहीं करेगी.

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जिसके बाद सीबीआई की टीम ने शिलांग में राजीव कुमार से 5 दिनों में कुछ 34 घंटे पूछताछ की. इस दौरान सीबीआई ने पूर्व टीएमसी सांसद कुणाल घोष को भी पूछताछ के लिए शिलांग बुलाया और दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. राजीव कुमार और पश्चिम बंगाल में यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले तय बताया जा रहा था.

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