गया रोडरेज केस: आदित्य के दोस्त ने बताया- पिस्तौल लहराकर अपना नाम बता रहा था रॉकी

गया रोड रेज केस में मारे गए आदित्य सचदेव के दोस्तों ने अदालत में सेक्शन 164 के तहत बयान दर्ज करवाएं हैं. वारदात के वक्त आदित्य अपने चार दोस्तों के साथ ही था.

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सबा नाज़ / रोहित कुमार

  • पटना,
  • 13 मई 2016,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

गया रोड रेज केस में मारे गए आदित्य सचदेव के दोस्तों ने अदालत में सेक्शन 164 के तहत बयान दर्ज करवाएं हैं. वारदात के वक्त आदित्य अपने चार दोस्तों के साथ ही था.

जेडीयू नेता मनोरमा देवी के बेटे पर का आरोप है. बताया जा रहा है कि रॉकी ने पास न मिलने पर आदित्य को गोली मार दी थी. बिहार के गया में हुए रोडरेज केस के आरोपी रॉकी यादव को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उधर, अब तक फरार रॉकी की मां मनोरमा देवी ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी है. मनोरमा देवी को जेडीयू ने पार्टी से सस्पेंड कर दिया है.

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आयुष ने कहा लैंड रोवर से आगे निकल गए थे
शुक्रवार को कोर्ट में आदित्य के दोस्त आयुष अग्रवाल ने बयान दर्ज करवाते हुए कहा कि 'मैं, मेरे दोस्त नामिद हुसैन, कैफी, आदित्य और अंकित सात मई को बोध गया से वापस गया लौट रहे थे. मुझे उस का नंबर याद नहीं जिसमें हम थे. हमने महारानी पेट्रोल पंप पर एक सिल्वर रंग की लैंड रोवर देखी थी. जिससे हम आगे निकल गए थे...'

अंकित ने कहा जाम की वजह से नहीं दिया पास
वहीं आदित्य के दूसरे दोस्त अंकित कुमार ने अपने बयान में बताया कि 'घटना लगभग 8.15 बजे की है. हम लोग बोध गया से बर्थडे पार्टी करके वापस लौट रहे थे. एक सिल्वर रंग की गाड़ी ने हमसे पास मांगा लेकिन आगे जाम लगे होने के कारण हम पास नहीं दे पाए.उसके बाद हम पुलिस लाइन एरिया के जेल रोड पर निकल गए...'

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नासिर ने कहा- पिस्तौल लहराकर रॉकी बता रहा था अपनी पहचान
नासिर हुसैन ने बयान में बताया कि पुलिस लाइन से जेल रोड पर मुड़ने के बाद हमारी स्विफ्ट कार नंबर BR 02AC 2699 में हमें गोली की आवाज सुनाई दी. जिसमें से एक शख्स कह रहा था कि रुक जाओ नहीं तो गोगी मार दूंगा. इसके बाद हमने गाड़ी रोक दी. लैंड रोवर गाड़ी जिसका नंबर DL 1 TEMP AU 7063 था उसमें से बंदूक लिए एक शख्स उतरा उसके साथ एक बॉडीगार्ड भी था. ड्राइवर ने मुझे और कैफ को पीटा. अपने हाथ में पिस्तौल लिए वो शख्स बता रहा था कि मेरा नाम है और मैं बिंदी यादव का बेटा हूं.

'डर कर भाग रहे थे कि चला दी गोली'
नासिर ने बताया कि पिटते-पिटते मेरे नाक से खून आने लगा, डर के मारे हम कार में बैठे और भागने लगे. इसके बाद हमें एक और गोली की आवाज आई. हम गाड़ी में बैठे हुए झुक गए ताकि हमें गोली न लग जाए. लेकिन तभी आयुष ने चिल्लाकर बताया कि आदित्य को गोली लग गई है. हम वहीं से सीधे मगध अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने आदित्य को मृत घोषित कर दिया. हमने वहां से भागने के बाद ये नहीं देखा कि हमलावर कहां गए.

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मुश्किल होगा साबित करना रॉकी ने चलाई थी गोली
आदित्य के दोस्तों अंकुर और नासिर ने अपने बयान में ये बात साफ की है कि उनमें से किसी ने भी रॉकी को आदित्य पर गोली चलाते नहीं देखा. आदित्य को गोली तब लगी जब वह लोग कार में सवार होकर भाग रहे थे. इस बयान के बाद कोर्ट में ये साबित करना वाकई मुश्किल होगा कि आखिर आदित्य पर गोली चलाई किसने थी?

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