G-20 के जानकारों ने माना नोटबंदी को आतंक के खिलाफ हथियार

इस आर्थिक फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन से जुड़े करीब सौ प्रतिनिधि शामिल हैं. ग्रुप की बैठक का मकसद विकसित और विकासशील देशों के बीच बढ़ती आर्थिक असामनता को दूर करना, मौजूदा जीडीपी दर को बढ़ाना और आपसी व्यापार में आने वाली अड़चनों को दूर करना है.

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गंगा आरती में शरीक होते G-20 देशों के प्रतिनिधि गंगा आरती में शरीक होते G-20 देशों के प्रतिनिधि

लव रघुवंशी

  • वाराणसी,
  • 29 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

वाराणसी में मंगलवार को G-20 देशों के आर्थिक फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप (एफडब्ल्यूजी) की बैठक का आगाज हुआ. दो दिनों के इस मंथन के पहले दिन सदस्य देशों के आर्थिक जानकारों ने आर्थिक विकास, रोजगार और आतंकवाद के मसलों पर चर्चा की.


बैठक के दौरान भारत में नोटबंदी और उसके असर के मसले पर भी बात हुई. ज्यादातर प्रतिनिधियों का मानना था कि भारत के इस कदम से आर्थिक विकास तो होगा ही, आतंकवाद से भी लोहा लिया जा सकेगा. विशेषज्ञों ने माना कि विदेशों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है और आने वाले वक्त में भारतीय बाजार में निवेश बढ़ेगा. G-20 के सदस्य देशों की नुमाइंदगी कर रहे कई वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों की राय थी कि आबादी की तुलना में रोजगार नहीं बढ़ रहे हैं. इसी वजह से भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी समस्याएं पनप रही हैं.

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G-20 सम्मेलन में रखा जाएगा एजेंडा
बैठक का आगाज मंगलवार को सुबह 8 बजे वाराणसी के ऐतिहासिक होटल गेटवे के गुलाबबाड़ी हॉल में हुआ. बैठक में तय होने वाले एजेंडे को जर्मनी में होने वाली G-20 सम्मेलन के दौरान पेश किया जाएगा. इस आर्थिक फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन से जुड़े करीब सौ प्रतिनिधि शामिल हैं. ग्रुप की बैठक का मकसद विकसित और विकासशील देशों के बीच बढ़ती आर्थिक असामनता को दूर करना, मौजूदा जीडीपी दर को बढ़ाना और आपसी व्यापार में आने वाली अड़चनों को दूर करना है.


बैठक में हिस्सा लेने आए प्रतिनिधियों को वाराणसी की सैर का भी मौका मिल रहा है. इनमें से कई लोगों ने मंगलवार की शाम को दश्वाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के दर्शन किये. बुधवार को ये प्रतिनिधि सारनाथ और बीएचयू का दौरा करेंगे.

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