ना बीज खरीद पाए ना खाद, नोटबंदी से ऐसे पिटे किसान

नोटबंदी को हाल ही में दो साल पूरे हुए हैं. पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव में भी नोटबंदी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो, PTI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो, PTI)

हिमांशु मिश्रा / मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 21 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने माना है कि नोटबंदी का फैसला देश के किसानों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा था. 8 नवंबर, 2016 को लिए गए इस फैसले से किसानों की आर्थिक हालत पर काफी बुरा असर पड़ा था. संसदीय समिति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय ने काफी बड़े खुलासे किए हैं, जो चौंकाते हैं. इस रिपोर्ट में क्या बड़ी बातें हैं, यहां पढ़ें...

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1. किसानों पर के फैसले का काफी बुरा असर पड़ा था. नगदी की कमी के चलते लाखों किसान, रबी सीजन में बुआई के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके.

2. नोटबंदी जब लागू हुई तब किसान या तो अपनी खरीफ की पैदावार बेच रहे थे या फिर रबी फसलों की बुआई कर रहे थे. ऐसे समय में किसानों को नगदी की बेहद जरूरत होती है, पर उस समय कैश की किल्लत के चलते लाखों किसान बीज और खाद नहीं खरीद सके.

3. बड़े किसानों को भी खेती के कामों का मेहनताना देने और खेती की जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत का सामना करना पड़ा था.

4. कैश की किल्लत के चलते राष्ट्रीय बीज निगम के लगभग 1 लाख 38 हजार क्विंटल गेहूं के बीज नहीं बिक पाए थे.

5. सरकार ने बाद में गेहूं के बीज खरीदने के लिए 1000 और 500 रुपए के पुराने नोटों के इस्तेमाल की छूट दे दी थी. कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की इस छूट के बाद भी बीज के बिक्री में कोई खास तेजी नहीं आई थी.

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को रात आठ बजे नोटबंदी का ऐलान किया था. इस फैसले से बाजार में जारी 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बैन हो गए थे. सरकार के इस ऐलान से आम जन को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. 

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