कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने आर्मी चीफ को कहा 'सड़क का गुंडा', रिजिजू ने किया पलटवार

हालांकि बयान देने के थोड़ी देर बाद ही संदीप दीक्षित ने अपने बयान पर माफी मांग ली.

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कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित

नंदलाल शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 11 जून 2017,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

आर्मी चीफ बिपिन रावत पर बयानबाजी का दौर जारी है. कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख को 'सड़क का गुंडा' की संज्ञा दी है. दीक्षित ने कहा कि हमारे सेना प्रमुख जब 'सड़क के गुंडे' की तरह बोलते हैं, तो खराब लगता है. दीक्षित के इस बयान के बाद बीजेपी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

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गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस पार्टी के साथ हो क्या रहा है? कांग्रेस आर्मी चीफ को सड़क का गुंडा कैसे कह सकती है.

हालांकि बयान देने के थोड़ी देर बाद ही संदीप दीक्षित ने अपने बयान पर माफी मांग ली. उन्होंने कहा, 'मैं मानता हूं कि मैंने जो कहा है. वह गलत है, इसलिए माफी मांगता हूं और अपना बयान वापस लेता हूं.'

कांग्रेस नेता दीक्षित ने कहा, 'पाकिस्तान एक ही चीज कर सकता है कि एक ही तरह की उल जुलूल हरकतें करे और बयानबाजी करे. खराब तब लगता है जब हमारे भी थल सेनाध्यक्ष एक सड़क के गुंडे की तरह बयान देते हैं. पाकिस्तान का दे तो दे, उनकी फौज में क्या रखा है. वो सब तो माफिया टाइप के लोग हैं, लेकिन हमारे सेनाध्यक्ष इस तरह के बयान क्यों देते हैं.'

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उन्होंने कहा कि देखिए हमारे पास सौम्यता है, सभ्यता है, गहराई है, ताकत है. हमारा देश दुनिया के देशों में एक आदर्श है. और हम भी इस तरह की हरकत करें, तो ओछी लगती है.

बता दें कि जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजों से बचाव के लिए मेजर लीलुत गोगोई ने ह्यूमन शील्ड के तौर पर एक नागरिक को जीप की बोनट पर बांध दिया था. इसके बाद मेजर के एक्शन को लेकर सियासी गलियारों में सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मेजर गोगोई के एक्शन का समर्थन किया और कहा कि जम्मू कश्मीर में लड़े जा रहे डर्टी वार में जवानों को इंतजार करने और मरने के लिए नहीं कह सकता.

केंद्र सरकार और बीजेपी ने भी सेनाध्यक्ष और मेजर गोगोई का समर्थन किया. हालांकि विपक्षी पार्टियों और नेताओं ने मेजर गोगोई के एक्शन पर सवाल उठाए.

हाल ही में इतिहासकार पार्था चटर्जी ने कश्मीर से संबंधित अपने लेख में मेजर लीलुत गोगोई द्वारा ह्यूमन शील्ड के तौर पर एक शख्स को जीप से बांधकर ले जाने की तुलना जलियांवाला बाग कांड से की. चटर्जी ने इसे आजाद भारत का जनरल डायर मोमेंट करार दिया.

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