चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तैयारी में भारत, पहले जानिए चंद्रयान-1 की उपलब्धियां

चंद्रयान 1 ने चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाकर इस सदी की महत्वपूर्ण खोज की थी. इसरो के अनुसार चांद पर पानी समुद्र, झरने, तालाब या बूंदों के रूप में नहीं बल्कि खनिज और चट्टानों की सतह पर भाप की तरह मौजूद है. चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी पूर्व में लगाए गए अनुमानों से कहीं ज्यादा है.

Advertisement
जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से छोड़ा जाएगा चंद्रयान-2.(फोटो क्रेडिट-ISRO) जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से छोड़ा जाएगा चंद्रयान-2.(फोटो क्रेडिट-ISRO)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 15 जुलाई को होने वाली चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तैयारी में जुटा है. चंद्रयान-2 भारत का दूसरा चंद्र मिशन है. पहली बार भारत चंद्रमा की सतह पर लैंडर और रोवर उतारेगा. वहां पर चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह, वातावरण, विकिरण और तापमान का अध्ययन करेगा. इसे तैयार करने में करीब 11 साल लग गए. चंद्रयान-2 की प्लानिंग से ठीक पहले इसरो ने चंद्रयान-1 लॉन्च किया था. चंद्रयान-1 ने सफलता के झंडे लहराए. पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय में भारती वैज्ञानिकों ने नाम ऊंचा किया. हमारा यह जानना जरूरी है कि देश के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने हमें क्या दिया...

Advertisement

2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च के लिए तैयार करते इसरो वैज्ञानिक.

1. सदी की महत्वपूर्ण खोज - चांद पर पानी खोजा निकाला

2009 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने दावा किया कि चांद पर पानी भारत की खोज है. चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी का पता चंद्रयान-1 पर मौजूद भारत के मून इंपैक्ट प्रोब (एमआईपी) ने लगाया. इसके बाद चंद्रयान में लगे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के उपकरण ने भी चांद पर पानी होने की पुष्टि की. चंद्रयान-1 ने चंद्रमा की सतह पर पानी के कणों की मौजूदगी के पुख्ता संकेत दिए थे. चंद्रयान ने चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाकर इस सदी की महत्वपूर्ण खोज की थी. इसरो के अनुसार चांद पर पानी समुद्र, झरने, तालाब या बूंदों के रूप में नहीं बल्कि खनिज और चट्टानों की सतह पर भाप की तरह मौजूद है. चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी पूर्व में लगाए गए अनुमानों से कहीं ज्यादा है.

2. चांद के दोनों ध्रुवों के अंधेरे वाले हिस्से के साथ कुल 70 हजार से ज्यादा तस्वीरे भेजीं

Advertisement

चंद्रयान-1 ने चंद्रमा के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के अंधेरे वाले हिस्सों की 360 डिग्री वाली तस्वीरे लीं. विभिन्न तरीकों से ली गईं तस्वीरों के ही जरिए चंद्रमा के वातावरण, विकिरण और परिस्थितियों का आकलन किया. चंद्रयान ने 2008 से 2009 के बीच चांद के 3000 चक्कर लगाए. इस दौरान उसने 70 हजार से अधिक तस्वीरें भेजी.

3. आज भी चांद का चक्कर लगा रहा है चंद्रयान-1

22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 चांद के लिए रवाना किया गया. 8 नवंबर 2008 को चंद्रयान चांद की कक्षा में पहुंचा. इसके बाद उसने 29 अगस्त 2009 तक चांद से संबंधित सैकड़ों फोटोग्राफ और डाटा दिया. 29 अगस्त 2009 को ही 11 महीने बाद उसका इसरो से संपर्क टूट गया. लेकिन इसके बावजूद चंद्रयान-1 अभी तक चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा है. 10 मार्च 2017 को नासा के जेट प्रोप्लशन लेबोरेट्री (जेपीएल) ने बताया कि चंद्रमा के 160 किमी ऊपर कोई वस्तु चक्कर लगा रही है. इसरो ने जब पता किया तो पता चला कि चंद्रमा के चारों तरफ उनका अपना चंद्रयान-1 ही है. जो चांद के ऊपर 150 किमी से 270 किमी की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगा रहा है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »