संसद में बोले जेटली, 'बीफ पॉलिटिक्स' कर रही है कांग्रेस

राज्यसभा में मॉब लिंचिंग और गोरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है. अगर ऐसा कोई करता है तो उसकी निंदा के साथ गिरफ्तारी भी होनी चाहिए.

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राज्यसभा में गोरक्षा और मॉब लिंचिंग पर बोले अरुण जेटली राज्यसभा में गोरक्षा और मॉब लिंचिंग पर बोले अरुण जेटली

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

मॉब लिंचिंग और गोरक्षा के मुद्दे पर राज्यसभा में बोलते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है. अगर ऐसा कोई करता है तो उसकी निंदा के साथ गिरफ्तारी भी होनी चाहिए.

अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस 'बीफ पॉलिटिक्स' खेल रही है. उन्होंने कहा कि लिंचिंग की घटनाओं का राजनीतिकरण बंद होना चाहिए.

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अरुण जेटली ने कहा कि अगर किसी राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध है और वहां ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है, तो वो गलत है.  इस दौरान अरुण जेटली ने कुछ घटनाओं से पूरी दुनिया में भारत की छवि बिगड़ने का भी जिक्र किया. जेटली ने बताया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले जुलूस निकाले गए कि चर्च पर अटैक हो रहे हैं. जिसका दुनिया के अंदर प्रचार हो गया कि भारत में चर्च पर अटैक किए जा रहे हैं. अरुण जेटली ने कहा कि कुछ घटनाओं पर ऐसा रिएक्ट नहीं करना चाहिए.

गोहत्या के नाम देश के विभिन्न स्थानों पर पीट पीट कर हत्या किए जाने की घटनाओं को किसी भी तरह से तर्कसंगत मानने से साफ इंकार करते हुए सरकार ने आज कहा कि ऐसे लोगों के साथ कोई सहानुभूति नहीं दिखायी जा सकती तथा इन मामलों में कानून पूरी तरह से अपना काम करेगा.

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सदन में वित्त मंत्री ने बताया कि गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ खुद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सख्त लहजे में चेतावनी दे चुके हैं. उन्होंने कहा कि गोरक्षा के नाम पर किसी को कानून के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा.

दलित पर जो अत्याचार हो रहे हैं, ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए पर्याप्त कानून हैं. उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार इसके लिए पूरे तरीके से प्रतिबद्ध है.

अरुण जेटली ने कहा गाय के प्रति सम्मान एक अलग विषय है. मगर किसी के प्रति हिंसा का आधार नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं और हमारे यहां सभी को बराबरी और धार्मिक आजादी का अधिकार है. हमारी संस्कृति आपसी मतों का सम्मान करने वाली है.

 

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