सेना कूच की खबर पर वीके सिंह बोले- मनीष तिवारी के पास कुछ काम नहीं है

कांग्रेस नेता के बयान पर केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि मनीष तिवारी के पास आज कल काम नहीं है, इसलिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं.

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जनरल वीके सिंह जनरल वीके सिंह

स्‍वपनल सोनल

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 11:47 PM IST

साल 2012 में आधी रात को बिना इजाजत सेना के दिल्ली कूच की खबर एक बार फिर चर्चा में है. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने शनिवार को करीब चार साल पुरानी इस घटना को सही करार दिया है, वहीं कांग्रेस ने उनके दावे से खुद को किनारा कर लिया. तत्कालीन सेना अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने भी मनीष तिवारी पर यह कहकर पलटवार किया है कि उनके पास आज कल कुछ काम नहीं है.

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कांग्रेस नेता के बयान पर केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि के पास आज कल काम नहीं है, इसलिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं. सिंह ने कहा, 'वो मेरी किताब पढ़ लें. सब खुलासा हो जाएगा. इससे पहले रविवार को दोपहर बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि उनके बयान में जोड़-घटाव का सवाल ही पैदा नहीं होता. उन्होंने कहा, 'मैंने जो कहा है बिल्कुल सही कहा है. इसमें जोड़ घटाव का कोई सवाल पैदा ही नहीं होता है.'

तिवारी बोले- वादा कीजिए आप मेरी किताब पढ़ेंगे
पूर्व सेना प्रमुख ने वीके सिंह ने मनीष तिवारी को रविवार को आड़े हाथ लिया. सिंह ने उज्जैन में संवाददाताओं से कहा, 'इन दिनों मनीष तिवारी के पास कोई काम नहीं है. बेहतर होगा, मैंने एक पुस्तक लिखी है, वह उसे पढ़ लें.' जवाब में तिवारी ने कहा कि वह वीके सिंह की पुस्तक पढ़ना पसंद करेंगे, लेकिन सिंह को यह वादा करना होगा कि भविष्य में वह उनकी भी पुस्तक पढ़ेंगे.

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इससे पहले, कांग्रेस की ओर से बोलते हुए पार्टी प्रवक्ता मनु सिंघवी ने कहा, 'तिवारी के बयान से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है. हमने पहले भी इनकार किया था. जब सेना से संबंधित यह कथित घटना सामने आई थी, तब वरिष्ठ मंत्रियों ने भी इस पर स्पष्टीकरण दिया था, और अब मैं स्पष्ट कर रहा हूं कि आरोपों में रत्ती भर सच्चाई नहीं है.'

'कमिटी के सदस्य ही नहीं थे तिवारी'
अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, 'मेरे साथी तिवारी न तो सुरक्षा पर किसी कैबिनेट कमिटी के सदस्य थे और न ही इस पर फैसला लेने वाली किसी दूसरी संस्था के.' उन्होंने कहा, 'वास्तव में उस वक्त भी स्पष्ट किया गया था कि की गतिविधियां रक्षा प्रणाली का अपरिहार्य व आवश्यक हिस्सा हैं. लेकिन इसके बारे में जो भी अन्य बातें सामने आ रही हैं, वह पूरी तरह गलत हैं.'

गौरतलब है‍ कि 2012 में जब यह कथित घटना घटी, तब कांग्रेस नीत यूपीए सरकार सत्ता में थी. सेना की टुकड़ी को आगे बढ़ने का कोई भी आदेश देने से इनकार कर चुके तत्कालीन सेना प्रमुख वीके सिंह वर्तमान में नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री हैं. कांग्रेस और सेना दोनों ने ही इस रिपोर्ट को तब खारिज कर दिया था.

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नवकी ने कहा- कभी चर्चा नहीं हुई
दूसरी ओर, उस वक्त रक्षा मंत्रालय की स्थाई समिति के सदस्य रहे और वर्तमान में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने रविवार को कहा कि इस मुद्दे पर समिति में कभी चर्चा भी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि संसदीय समिति में हुई चर्चा को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

तिवारी तब चुप क्यों रहेः BJP
बीजेपी नेता एसएन सिंह ने मनीष तिवारी की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि तिवारी ने तब चुप्पी क्यों साध ली थी जब 2012 में उनकी ही सरकार ने कूच की इस खबर को गलत बता दिया था? उन्होंने तब कुछ क्यों नहीं कहा था?

क्या कहा था तिवारी ने
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने शनिवार देर शाम एक पुस्तक के लोकार्पण के मौके पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि 2012 में एक अंग्रेजी अखबार में छपी वह खबर दुर्भागयवश सही थी. उन्होंने कहा कि जिस वक्त कथित घटना सामने आई थी, उस वक्त वह रक्षा मंत्रालय की स्थाई समिति के सदस्य थे. तिवारी ने कहा, 'यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण, लेकिन सच है. जहां तक मेरी जानकारी की बात है, तो यह घटना सच है.'

क्या छापा था अखबार ने
समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जनवरी 2012 को जिस वक्त जनरल वीके सिंह ने अपनी जन्म तिथि के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, खुफिया एजेंसियों ने नई दिल्ली के निर्देश पर हरियाणा के हिसार से एक मुख्य सैन्य इकाई द्वारा एक अप्रत्याशित व गैर-अधिसूचित गतिविधि की खबर दी थी.

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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार को सेना की इस गतिविधि की कोई जानकारी नहीं थी. इसके बारे में खुफिया एजेंसियों ने सबसे पहले रक्षा मंत्री को खबर दी. इसके बाद 17 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री को इसके बारे में जानकारी दी गई. जानकारी के बाद मौके पर तुरंत चुपचाप जांच शुरू की गई. आनन-फानन में रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा को मलेशिया के उनके विदेश दौरे से दिल्ली वापस बुलाया गया. इतना ही नहीं, बाहर से दिल्ली में आने वाली गाड़ियों की सघन चेकिंग तक शुरू हो गई. रक्षा सचिव ने सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी से तुरंत मामले की पूरी जानकारी ली.

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