पंजाब के पुलिसिंग मॉडल की कहानी, जिससे बढ़ी सजा की दर...कोर्ट में हार रहे नशा तस्कर

पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान एनडीपीएस के मामलों में सजा की दर बढ़ी है. पंजाब का दावा है कि वह सजा की दर के मामले में नंबर एक पर पहुंच गया है. इसके पीछे पंजाब पुलिस के पुलिसिंग मॉडल में आया कौन सा बदलाव वजह है?

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अधिकारियों ने बताया कि कैसे आया बदलाव (Photo: Representational ) अधिकारियों ने बताया कि कैसे आया बदलाव (Photo: Representational )

aajtak.in

  • चंडीगढ़,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ एक अभियान छेड़ रखा है 'युद्ध नशेयां विरुद्ध'. इस अभियान को लेकर सरकार का दावा है कि इसे अब सिर्फ़ गिरफ्तारियों से नहीं, बल्कि सजा दिलाने की दर में आई ज़बरदस्त तेजी से पहचाना जा रहा है. ये सजाएं कोर्ट में भी टिकी हुई हैं, जो नशीले पदार्थों के खिलाफ राज्य की रणनीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में एजेंसियां अब इसे कानूनी रूप से मज़बूत मामले बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जो यह सुनिश्चित करें कि तस्कर न केवल पकड़े जाएं बल्कि उन्हें सजा भी मिले.

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पंजाब में नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों (NDPS) अधिनियम के तहत मामलों में सजा की दर 88% पहुंच गई है. अधिकारी इसका श्रेय पुलिसिंग में आए एक व्यवस्थित बदलाव को देते हैं. इस बदलाव में अभियोजन-नेतृत्व वाली जांच, वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा करना, नशीले पदार्थों के नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखना और तकनीक-आधारित खुफिया जानकारी इकट्ठा करना शामिल है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में कोर्ट ने एनडीपीएस के 4812 मामले निपटाए. इनमें से कुल 3870 मामलों में सजा हुई है. एनडीपीएस के मामलों में सजा की दर 80% रही.

साल 2023 में यह दर बढ़कर 81% हो गई, जिसमें 6976 मामलों में से 5635 मामलों में सजा सुनाई गई. 2024 में यह और बढ़कर 85% हो गई, जिसमें 7281 मामलों में से 6219 मामलों में सजा हुई. साल 2025 में सजा दर 88% तक पहुंच गई, जिसमें 7373 मामलों में से 6488 मामलों में सजा हुई. 2026 में, अब तक निपटाए गए एनडीपीएस के 1831 मामलों में से 1634 मामलों में कोर्ट सजा सुना चुका है, जिससे सजा दर बढ़कर 89% हो गई है. पंजाब पुलिस का दावा है कि यह पूरे देश में सबसे ज्यादा है.

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पंजाब पुलिस का कहना है कि ये नतीजे 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान की वजह से मिल रहे हैं. इस अभियान ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों को एक मज़बूत नीतिगत दिशा और संस्थागत समर्थन प्रदान किया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ प्रयास केवल ज़ब्ती और गिरफ्तारियों तक ही सीमित न रहें, बल्कि एक तय समय-सीमा के भीतर सजा दिलाने तक आगे बढ़ें. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस सफलता की कुंजी पुलिसिंग की सोच में आए एक बुनियादी बदलाव में निहित है.

पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमारा मकसद सिर्फ़ तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं है, बल्कि यह भी पक्का करना है कि उन्हें जेल भी हो. हमारी जांच अब सबसे ऊंचे कानूनी मानकों के हिसाब से की जाती है, जिससे ट्रायल के दौरान केस मज़बूत रहें. उन्होंने आगे कहा कि नशीले पदार्थों को ज़ब्त करने से लेकर दस्तावेज बनाने और फ़ॉरेंसिक जांच तक, हर कदम एनडीपीएस के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए उठाया जाता है, जिससे तस्कर सिर्फ तकनीकी कमियों के आधार पर बचकर न निकल सकें.

अफसरों ने बताया कि सजा दिलाने की ऊंची दर सिस्टम से जुड़े कई सुधारों का नतीजा है.  इनमें व्यवस्थित और क्रमबद्ध ट्रेनिंग प्रोग्राम, जांच करने वाले अफसरों को हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अपनाए जाने वाले सबसे अच्छे तरीकों से रूबरू कराना, 60 पॉइंट वाली जांच चेकलिस्ट के साथ एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करना और अदालतों में केस को असरदार तरीके से संभालने के लिए ट्रायल स्पेशल अफसरों की नियुक्ति शामिल है. पटियाला में राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के साथ भी सहयोग स्थापित किया गया है.

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अफसरों  के मुताबिक यहां सभी जांच करने वाले अफसरों के लिए छह दिन की सर्टिफ़िकेशन ट्रेनिंग जरूरी है. यूनिवर्सिटी में अब तक 400 से ज्यादा जांच अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिससे जांच की गुणवत्ता में सुधार हुआ है. यह देखते हुए कि NDPS एक्ट भारत के सबसे सख़्त आपराधिक कानूनों में से एक है, जिसमें तलाशी, ज़ब्ती और सबूतों को संभालने के लिए सख़्त प्रक्रिया हैं. अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि छोटी सी चूक भी केस को कमजोर कर सकती है. इसलिए, पंजाब पुलिस ने जांच करने वालों को वैज्ञानिक जांच के तरीकों और सबूतों की सुरक्षा के सख़्त नियमों में ट्रेनिंग देने पर काफी निवेश किया है, जिससे यह पक्का हो सके कि सबूत कानूनी तौर पर सही रहें.

सजा दिलाने की की दर में सुधार का एक और बड़ा कारण 'इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग' को अपनाना रहा है, जिसे टेक्नोलॉजी और नागरिकों की भागीदारी का समर्थन मिला है. डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और गुमनाम सूचना देने वाले सिस्टम के जरिये नागरिकों को नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे हजारों ऐसी जानकारियां मिली हैं जिन पर कार्रवाई की जा सकती है और संगठित नशीले पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिली है.

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अधिकारियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी के आर्थिक बेस को निशाना बनाते हुए वित्तीय जांच भी तेज कर दी है. नशीले पदार्थों से कमाए गए पैसे से खरीदी गई संपत्तियों को ज़ब्त करने के लिए कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है. हाल के वर्षों में, सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान करके उन्हें फ़्रीज किया गया है. हालांकि हर साल हजारों एनडीपीएस केस दर्ज होते हैं और हजारों तस्कर गिरफ्तार किए जाते हैं. अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सिर्फ़ कार्रवाई के आंकड़े ही सफलता की परिभाषा नहीं हैं.

एक अधिकारी ने कहा कि असली रोक तो सजा मिलने की निश्चितता है. जब तस्करों को यह एहसास होता है कि गिरफ्तारी के बाद निश्चित रूप से उन्हें सजा होगी और संपत्ति ज़ब्त हो जाएगी, तो इससे एक कड़ा संदेश जाता है कि नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध बिना सजा के नहीं छूटेंगे. अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह व्यापक इकोसिस्टम वाला नजरिया जिसमें कार्रवाई, वित्तीय जांच, सामुदायिक जानकारी और पुनर्वास को एक साथ जोड़ा गया है. नशीले पदार्थों की समस्या की सप्लाई और डिमांड, दोनों ही पहलुओं को तोड़ने में मदद कर रहा है. जांचकर्ताओं, सरकारी वकीलों और फॉरेंसिक प्रणालियों को एक समन्वित ढांचे में लाने से, अदालतों में पेश किए जाने वाले मामलों की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है.

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पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि हमारा नजरिया सीधा सा है, हर केस कानूनी रूप से मजबूत होना चाहिए. सबूतों पर आधारित होना चाहिए और ट्रायल की कसौटी पर खरा उतरने लायक होना चाहिए. सजा मिलने की दर, नशीले पदार्थों के खिलाफ इस लड़ाई में जांचकर्ताओं और सरकारी वकीलों की कड़ी मेहनत और नागरिकों के सहयोग को दर्शाती है. गौरतलब है कि पंजाब देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के मुख्य रास्तों में से एक है.

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