बदलता पंजाब: एक ही श्मशान घाट पर दलितों, सवर्णों का अंतिम संस्कार

पहले दलितों के लिए हर गांव में अलग श्मशान घाट हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ पंजाब बदल रहा है और पटियाला के 144 गांवों में जाति आधारित श्मशान घाटों की परंपरा अब खत्म हो गई है.

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पटियाला के गांवों में बनाए गए श्मशान घाट (फोटो-सोशल मीडिया) पटियाला के गांवों में बनाए गए श्मशान घाट (फोटो-सोशल मीडिया)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2019,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

पंजाब के पटियाला में जाति की दीवारें धीरे-धीरे टूटती जा रही हैं. अब एक ही श्मशान घाट का इस्तेमाल गांव का हर परिवार कर रहा है. पहले दलितों के लिए हर गांव में अलग श्मशान घाट हुआ करता था, लेकिन समय के साथ पंजाब बदल रहा है और पटियाला के 144 गांवों में जाति आधारित श्मशान घाटों की परंपरा अब खत्म हो गई है.

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पटियाला के गोबिंदपुरा के दलित गुरदर्शन सिंह ने बताया कि पहले हमारा श्मशान घाट गांव से बहुत दूर था, करीब 2 किलोमीटर दूर खेतों में. वहां न तो पीने के पानी की सुविधा थी, न ही उचित सड़क. अब हम सामान्य श्रेणी के लोगों के लिए इस्तेमाल होने वाले श्मशान घाट पर अपने मृतकों का अंतिम संस्कार करते हैं. इस श्मशान घाट पर पानी, वॉशरूम आदि जैसी सभी सुविधाएं हैं.

पूर्व सरपंच गुरदर्शन सिंह कहते हैं कि अब हर कोई एक-दूसरे के दुःख के समय साथ होता है. जात-पात के बंधन को तोड़कर अब अनुसूचित जाति या जनजाति और सामान्य श्रेणी के लोग एक-दूसरे के अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं. हम एक-दूसरे के घरों में भी जाते हैं. ये बदलाव काफी सकारात्मक है.

गोबिंदपुर गांव को सांसद निधि से 3 लाख रुपये मिले थे, जिसका उपयोग गांव वालों ने श्मशान घाट की चाहदीवारी, शेड और शौचालय बनाने के लिए किया. दलितों के लिए बनाए गए पुराने श्मशान घाट को बंद करके उसे एक पार्क में तब्दील कर दिया गया है. गांव के 1,050 मतदाताओं में से 250 दलित हैं.

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पटियाला की ही तरह एक और गांव अबलोवाल में भी यह बदलाव आया है. यहां भी हर जाति के लोग अब एक श्मशान घाट का इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां एक और महत्वपूर्ण बदलाव आया है. दो दलितों को अब गांव की गुरुद्वारा की प्रबंधन समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है.

पटियाला जिले के गोबिंदपुरा समेत 144 गांवों में जाति आधारित श्मशान घाटों की परंपरा को खत्म करने का काम पूर्व सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने किया. गांधी आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट पर 2014 का चुनाव जीते थे. बाद में उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. 2019 का चुनाव गांधी ने पंजाबी एकता पार्टी के टिकट पर लड़ा, लेकिन कांग्रेस के परनीत कौर से हार गए.

पूर्व सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने बताया कि हम यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि सिख गुरुओं की भूमि पर मृत्यु के बाद भी भेदभाव हो. मृत्यु में सम्मान और समानता सभी का अधिकार है. कुछ गांवों में पांच श्मशान घाट थे. यह पंजाब है, जिसने दुनिया को लंगर, संगत और पंगत सिखाया है और यह कि हर इंसान समान है. मैंने पंचायतों को स्पष्ट कर दिया था कि वे मुझे वोट दें या नहीं, लेकिन यह परंपरा खत्म करनी होगी.

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पूर्व सांसद ने बताया कि मैंने 144 गांवों में श्मशान घाटों के लिए 3 करोड़ रुपये अपने सांसद निधि से दिए थे. 14 पंचायतों ने अलग श्मशान की परंपरा को बदलने से इंकार कर दिया था. मैंने इन 14 गांवों को अपने सांसद निधि से कोई भी अनुदान नहीं दिया.

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