श्री गुरु रविदास जी की ओर से छह शताब्दी पहले दिए गए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता के संदेश को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए पंजाब सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है. पंजाब सरकार अब श्री गुरु रविदास की शिक्षा के प्रसार के लिए जालंधर जिले में श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र का निर्माण कराएगी.
श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र का निर्माण डेरा बल्लां के निकट कराया जाना है. पंजाब सरकार के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह जानकारी दी. हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि यह अध्ययन केंद्र देश भर में अपने आप में एक अनूठी पहल होगी. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने 10 करोड़ रुपये की लागत से कुल 9 एकड़ से अधिक भूमि इस अध्ययन केंद्र के नाम दर्ज करा दी है.
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और विचारधारा को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया और कहा कि इस उद्देश्य के लिए आज कुल तीन रजिस्ट्रियां हुईं.
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि गांव नौगजा (64 कनाल और 5 मरले, लागत 5 करोड़ 40 लाख 98 हजार 500 रुपये), गांव फरीदपुर की पहली रजिस्ट्री (2 कनाल, लागत 16 लाख 74 हजार रुपये) और गांव फरीदपुर में दूसरी रजिस्ट्री (10 कनाल और 14 मरले, लागत 1 करोड़ 44 लाख 62 हजार 150 रुपये) की गई हैं. उन्होंने बताया कि कुल तीनों रजिरविस्ट्रियों का क्षेत्रफल 76 कनाल 19 मरले है और कुल लागत 7 करोड़ 2 लाख 54 हजार 659 रुपये है.
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि हमें इस नेक कार्य में योगदान देने पर गर्व है. हमारी सरकार श्री गुरु रविदास जी द्वारा प्रचारित समानता, करुणा और सामाजिक न्याय के सार्वभौमिक संदेश को फैलाने के लिए समर्पित है. उन्होंने आगे कहा कि यह अध्ययन केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी ज्ञान का प्रकाश स्तंभ सिद्ध होगा. इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराना और सामाजिक-आर्थिक अंतर को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाना है.
पंजाब सरकार के वित्त मंत्री ने आगे कहा कि श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र का उद्देश्य सेमिनार, प्रकाशन और समुदाय-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से श्री गुरु रविदास जी की शिक्षा और संदेश का शोध, संरक्षण और प्रचार करना है.
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