पार्टी में ही घिर गए त्रिपुरा के CM बिप्लब देब, जानें कौन हैं चुनौती दे रहे सुदीप राय बर्मन

त्रिपुरा की सितायत में सुदीप रॉय बर्मन का अपना सियासी वर्चस्व है. सुदीप रॉय को राजनीति विरासत में मिली है, उनके पिता राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. अगरतला विधानसभा क्षेत्र से सुदीप रॉय 1998 से लगातार विधायक बनते आ रहे हैं. उन्होंने अपना सियासी सफर कांग्रेस से शुरू किया और प्रदेश अध्यक्ष तक रहे, लेकिन बाद में टीएमसी और मौजूदा समय में बीजेपी में है. इन दिनों मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ बगावत छेड़ रखी है.

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त्रिपुरा के सीएम बिप्लव दबे और सुदीप रॉय बर्मन त्रिपुरा के सीएम बिप्लव दबे और सुदीप रॉय बर्मन

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 09 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST
  • त्रिपुरा में मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत छिड़ी
  • बीजेपी के लिए सुदीप रॉय बर्मन बने सिरदर्द
  • सुदीप के पिता त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं

पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में दो साल पहले लेफ्ट के मजबूत किले को ध्वस्त कर सत्ता पर काबिज हुई बीजेपी के अंदर सियासी उठापटक शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री बिप्लब देब अपनी ही पार्टी में घिर गए हैं और उन्हें हटाने की मुहिम पार्टी के कुछ नेताओं ने छेड़ रखी है. बिप्लब के खिलाफ बगावत का झंडा सुदीप रॉय बर्मन ने उठा रखा है. वहीं, बिप्लब देब ने कहा है कि वह 13 दिंसबर को जनता के बीच जाकर लोगों से पूछेंगे कि उन्हें मुख्यमंत्री रहना चाहिए कि नहीं. इसके बाद ही वो अपना फैसला लेंगे, लेकिन सवाल उठता है कि कौन हैं सुदीप रॉय बर्मन जिन्होंने मुख्यमंत्री के सामने चुनौती पेश की है. 

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त्रिपुरा की सितायत में सुदीप रॉय बर्मन का अपना सियासी वर्चस्व है. सुदीप रॉय को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता समीर रंजन बर्मन त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. सुदीप ने अपना सियासी सफर कांग्रेस से शुरू किया था और अगरतला विधानसभा सीट को अपनी कर्मभूमि बनाई. इस सीट पर लेफ्ट तमाम कोशिशों के बाद भी सुदीप रॉय बर्मन को कभी मात नहीं दे सका था. वो 1998 से लगातार चुनाव से जीत दर्ज करते आ रहे हैं.  

सुदीप रॉय बर्मन का जन्म चार दिसंबर 1966 को हुआ. 1989 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से बीई (मेकेनिकल) और 1992 में त्रिपुरा विश्वविद्यालय से एलएलबी डिग्री पूरी की. इसके बाद कांग्रेस से उन्होंने अपना सियासी सफर शुरू किया. वे त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी और त्रिपुरा प्रदेश युवा कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष थे और साथ ही साथ त्रिपुरा विधान सभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं. 

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अगरतला विधानसभा क्षेत्र से सुदीप रॉय पहली बार 1998 में विधायक बने और कांग्रेस के टिकट पर  चार चुनाव जीत दर्ज की. इसके बाद 2016 में उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का दामन थाम लिया, जो कि कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था. हालांकि, सुदीप का टीएमसी से बहुत जल्द ही मोहभंग हो गया. इस तरह से 2017 में सुदीप ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. 2018 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर जीतने में कामयाब रहे. 


दरअअस, सुदीप रॉय को राजनीति भले ही अपने पिता से विरासत में मिली है, लेकिन सुदीप ने अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ बनाई है. वह त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी और त्रिपुरा प्रदेश युवा कांग्रेस समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं. इस तरह से त्रिपुरा के दूसरे इलाकों में भी उनका अपना सियासी आधार है. इसी का नतीजा था कि बीजेपी की 2018 में सरकार बनी तो सुदीप रॉय को स्वास्थ्य मंत्रालय जैसा भारी भरकम मंत्रालय दिया गया था.

हालांकि, मुख्यमंत्री के साथ भी बिप्लब देब के रिश्ते जल्द ही बिगड़ने लगे. ऐसे में सीएम बिप्लब देब ने 2019 में उन्हें अपनी कैबिनेट से बाहर कर दिया. ऐसे में वो कुछ दिनों तक शांत रहे, लेकिन अब खुला मोर्चा खोल दिया है, जिसमें बीजेपी के कुछ विधायक भी अब उनके साथ आ गए हैं. 

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