उद्धव सेना को एक और झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी रहे एमएलसी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. यहां सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन कर दिया है.

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आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे को लगातार झटके पर झटके मिल रहे हैं (Photo-ITG) आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे को लगातार झटके पर झटके मिल रहे हैं (Photo-ITG)

ऋत्विक भालेकर

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST

महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार उथल-पुथल हो रही है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़ा झटका लगा है. शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर ने पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है. शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया.

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आदित्य ठाकरे के करीबी रहे हैं सचिन अहीर

सचिन अहीर को लंबे समय तक आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है. वर्ष 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने शिवसेना का रुख किया था. उस समय माना गया था कि उनके पार्टी में आने से आदित्य ठाकरे के लिए मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का रास्ता आसान हुआ. इसके बाद अहीर पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे.

साल 2022 में शिवसेना के बंटवारे के बाद भी सचिन अहीर उद्धव ठाकरे के साथ बने रहे थे. हालांकि अब उन्होंने राजनीतिक पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का साथ चुन लिया है. उनके इस फैसले को उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. शिंदे गुट की ओर से विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए सचिन अहीर का नाम आगे बढ़ाया गया है.

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वर्ली सीट से जुड़ा है राजनीतिक इतिहास

सचिन अहीर का राजनीतिक इतिहास भी वर्ली सीट से जुड़ा हुआ है. यह वही विधानसभा सीट है, जहां से आदित्य ठाकरे ने साल 2019 में जीत हासिल की थी.लेकिन इस जीत में दो लोगों का अहम योगदान है. एक तो थे सुनील शिंदे, जो पहले ही उद्धव सेना से दूरी बना चुके हैं.

आदित्य ठाकरे का जब चुनाव लड़ने का फैसला तय हो गया और मातोश्री से आदेश आया, तो सुनील शिंदे ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जीती-जतायी सीट आदित्य ठाकरे के लिए 'कुर्बान' कर दी थी. आदित्य ठाकरे वर्ली से चुनाव लड़े और जीतकर विधायक बने.सुनील शिंदे के सीट छोड़ने के फैसले को शिवसेना की परंपरा और ठाकरे परिवार के प्रति अटूट निष्ठा के रूप में देखा गया था. 

NCP से शिवसेना (उद्धव गुट) में आए थे सचिन अहीर 

वहीं, सचिन अहीर, जो पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता और मुंबई प्रमुख हुआ करते थे, जुलाई 2019 में शिवसेना में शामिल हो गए थे. सचिन अहीर का वर्ली और आसपास के इलाकों में मजबूत प्रभाव रहा है. 2019 में उनके शिवसेना में आने से आदित्य ठाकरे की वर्ली में जीत की राह काफी आसान हो गई थी. सचिन अहीर को बाद में शिवसेना (UBT) की ओर से विधान परिषद (MLC) का सदस्य चुना गया था.

लेकिन, अब सचिन अहीर भी बागी हो चुके हैं और शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं.

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