'कल्याण सिंह कल्याण करो, मंदिर का निर्माण करो', वो नारा जिसने बीजेपी को बना दिया राम भक्तों की पार्टी

कल्याण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन में जान फूंकी और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा. कल्याण सिंह की सक्रियता से बीजेपी, यूपी में मजबूत पार्टी बनकर उभरी.

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यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटोः इंडिया टुडे) यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटोः इंडिया टुडे)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST
  • युवाओं में सिर चढ़कर बोल रही थी कल्याण की लोकप्रियता
  • उन नेताओं में शामिल थे कल्याण जो बीजेपी की बुनियाद थे

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के फायर ब्रांड नेता रहे यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का निधन हो गया है. कल्याण सिंह के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक व्यक्त किया है. कल्याण सिंह की गिनती उन नेताओं में होती है, जिन्होंने बीजेपी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

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देश में 90 के दशक की सियासत मंडल-कमंडल के इर्द-गिर्द घूम रही थी. इससे पहले जब बीजेपी का गठन हुआ तो कल्याण सिंह को प्रदेश संगठन में पदाधिकारी बनाया गया. कल्याण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन में जान फूंकी और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा. कल्याण सिंह की सक्रियता से बीजेपी, यूपी में मजबूत पार्टी बनकर उभरी. राम मंदिर की लहर में बीजेपी ने साल 1991 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया.

बीजेपी ने यूपी में सरकार बनाई. यूपी में उस समय कल्याण सिंह की लोकप्रियता सिर चढ़कर बोल रही थी. यूपी में सरकार बनी तो बीजेपी ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया. कल्याण राम मंदिर आंदोलन के लिए जैसे एक आस बनकर उभरे थे. यूपी में उस समय युवाओं ने एक नारा दिया था- 'कल्याण सिंह कल्याण करो, मंदिर का निर्माण करो.' यूपी में हर तरफ इस नारे की गूंज थी.

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कल्याण सिंह यूपी में यूथ आइकन बनकर उभरे थे. बीजेपी राम भक्तों की पार्टी के रूप में उभर रही थी. कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते ही कारसेवकों ने बाबरी ढांचा गिराया था. 6 दिसंबर 1996 को कल्याण सिंह अपने मंत्रिमंडल के सहयोगी लालजी टंडन और ओपी सिंह के साथ अपने आवास पर बैठकर टीवी देख रहे थे.

डीजीपी को नहीं दिया था फायरिंग का आदेश

अयोध्या में बिगड़ते हालात के बीच यूपी के तत्कालीन डीजीपी मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मिलने पहुंचे. कल्याण ने उन्हें लाठी-डंडे, आंसू गैस का उपयोग करने की छूट दी लेकिन फायरिंग की इजाजत देने से साफ मना कर दिया. डीजीपी जब तक इसे लेकर कोई निर्णय ले पाते, कार सेवकों ने बाबरी का ढांचा गिरा दिया था. बाबरी ढांचा विध्वंस के ठीक बाद कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

 

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