राज्यों को मिलेगा OBC लिस्ट तैयार करने का अधिकार, संविधान संशोधन विधेयक पर मोदी कैबिनेट की मुहर

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उस संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी खुद की ओबीसी सूची बनाने का अधिकार देता है. अब राज्यसभा और लोकसभा में बिल पेश किया जा सकता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो-PTI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो-PTI)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 10:23 PM IST
  • राज्यों के पास नहीं था लिस्ट तय करने का अधिकार
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा था केवल केंद्र के पास ही शक्ति
  • संविधान संशोधन विधेयक को मिली मोदी कैबिनेट की मंजूरी

केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार देने वाले विधेयक को पास करने की तैयारियों में जुटी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उस संविधान संशोधन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके जरिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने क्षेत्र में ओबीसी वर्ग की सूची तैयार कर सकेंगे. ओबीसी को साधने की केंद्र की यह बड़ी पहल मानी जा रही है.

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दरअसल 5 मई को ही सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि केवल केंद्र सरकार को यह अधिकार होगा कि वह ओबीसी की सूची तैयार कर सके. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी.

संविधान संशोधन को मंजूरी देने के बाद माना जा रहा है कि इसी मॉनसून सत्र में सरकार संशोधन बिल को पास कराएगी. ओबीसी वर्ग को लेकर केंद्र सरकार का यह दूसरा बड़ा कदम है. अब राज्यों के पास अपनी ओबीसी सूची बनाने का अधिकार होगा. केंद्र सरकरा ने बीते सप्ताह मेडिकल शिक्षा में ओबीसी वर्ग के लिए केंद्रीय कोटे से आरक्षण दिया था.

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के अधिकार से किया था इनकार

दरअसल सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने आरक्षण पर पुनर्विचार को लेकर एक याचिका पर सुनवाई करने की मांग को खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 102वें संविधान संशोधन के बाद राज्यों के पास नौकरियों और एडमिशन में समाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग(SEBC) का कोटा घोषित करने का अधिकार नहीं रह गया है.

क्यों हो रहा है बदलाव?

दरअसल 2018 के 102 वें संविधान संशोधन अधिनियम में अनुच्छेद 338B सम्मिलित किया गया, जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की संरचना, कर्तव्यों और शक्तियों से संबंधित है, वहीं 342A राष्ट्रपति की शक्तियों को एसईबीसी के रूप में एक विशेष जाति को अधिसूचित करने और संसद को लिस्ट में बदलाव करने की शक्ति देता है. विपक्षी दलों ने केंद्र पर अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) की पहचान करने और उन्हें सूचीबद्ध करने की राज्यों की शक्ति को छीनकर संघीय ढांचे पर हमला करने का आरोप लगाया था.

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सरकार बदलाव पर कर रही थी विचार

कांग्रेस ने कहा था कि इस संबंध में संसद में बहस के दौरान स्पष्ट आशंकाएं थीं और संबंधित मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया था कि उसका इरादा राज्यों के अधिकार को छीनने का नहीं है. हालांकि, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने पिछले महीने राज्यसभा में कहा था कि सरकार कानूनी विशेषज्ञों और कानून मंत्रालय के साथ परामर्श कर रही है. ओबीसी की राज्य सूची निर्धारित करने में राज्यों की शक्ति पर विचार कर रही है. 

केंद्रीय कैबिनेट ने लगाई मुहर

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी ओबीसी सूची बनाने की शक्ति देने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है. 5 मई को, न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से मराठों को आरक्षण देने वाले महाराष्ट्र कानून को गलत ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ​हम 1992 के फैसले की फिर से समीक्षा नहीं करेंगे, जिसमें आरक्षण का कोटा 50 फीसदी पर रोक दिया गया था. 
 

 

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