ब्रिटेन के संसद परिसर ने पहले भारतीय स्वतंत्रता दिवस समारोह की मेजबानी की

भारत (व्यापार और निवेश) सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) की प्रमुख बेरोनैस सैंडी वर्मा ने भारत की आजादी के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में जो हासिल हुआ है उसके जश्न के रूप में इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला गया. इस मौके पर सुनक मंत्रिमंडल के कई सदस्य भी शामिल थे.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

भारत की आजादी के 76वें वर्ष को चिह्नित करने के लिए ब्रिटिश संसद परिसर में अपनी तरह के पहले समारोह की मेजबानी की गई. इस कार्यक्रम का आयोजन सभी दलों और भारत (व्यापार और निवेश) सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) के समर्थन से किया गया.

ब्रिटिश भारतीय विचारक संस्था ‘1928 इंस्टीट्यूट’ ने ब्रिटेन के उच्च सदन के रिवर रूम में सोमवार शाम को स्वागत समारोह से पहले भारत, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नेपाल सहित अन्य देशों के उच्चायुक्तों को एक साथ लाते हुए ‘भारत और हिंद-प्रशांत’ शीर्षक से एक विशेष गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया.

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मुख्य भाषण विपक्ष के नेता सर कीर स्टार्मर ने दिया, जिन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए लेबर पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई. स्टार्मर ने कहा, 'मुझे यह खासतौर पर विशेष लगता है कि यह पहली बार है जब संसद में इस तरह का आयोजन हुआ है.'

उन्होंने कहा, 'यहां होना और इस अहम पड़ाव का गवाह बनना बिल्कुल अविश्वसनीय है, और जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, और भी बहुत कुछ हो सकता है. बेशक, भारत ने (प्रधानमंत्री क्लेमेंट) एटली सरकार के तहत अपनी स्वतंत्रता हासिल की – युद्ध के बाद एक अच्छी लेबर सरकार. मेरे नेतृत्व में, लेबर उन अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों पर काम करना जारी रखेगी जो उस समय के महत्वपूर्ण निर्णय पर आधारित थे और वैश्विक मंच पर भारत के साथ काम करेंगे.'

भारत (व्यापार और निवेश) सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) की प्रमुख बेरोनैस सैंडी वर्मा ने भारत की आजादी के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में जो हासिल हुआ है उसके जश्न के रूप में इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला गया. इस मौके पर सुनक मंत्रिमंडल के कई सदस्य भी शामिल थे.

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भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने कहा, 'हमें अनिवार्य रूप से इसे एक दूरदर्शी साझेदारी के रूप में देखने की जरूरत है. हम अक्सर गलती करते हैं, और मुझे लगता है कि यह हमारी दोनों संस्कृतियों में एक आम भावना है कि हम अतीत को भूलकर आगे का रास्ता तलाशने की कोशिश करते हैं.'

 

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