केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना पर पिछले करीब दस वर्षों में 10,169 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. एक आरटीआई के जवाब से सामने आया है कि सरकार ने इस राशि का बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास और आर्थिक रूप से घाटे वाले हवाई मार्गों पर उड़ानें संचालित करने के लिए एयरलाइंस को सब्सिडी देने में खर्च किया है.
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को जोधपुर दौरे के दौरान UDAN योजना को 2037 तक अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं.
आरटीआई के मुताबिक, वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत सरकार ने एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम विकसित करने के लिए 5,500 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. इनमें से 31 मार्च 2026 तक 4,833.25 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
वहीं, क्षेत्रीय और आर्थिक रूप से कम लाभदायक हवाई मार्गों पर उड़ानें जारी रखने के लिए एयरलाइंस को वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के रूप में 4,669.02 करोड़ रुपये दिए गए. यह वह वित्तीय सहायता होती है, जिससे एयरलाइंस को परिचालन लागत और कमाई के बीच होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है.
आरटीआई के अनुसार, एयरलाइंस को दी गई सब्सिडी में इंडिगो सबसे बड़ा लाभार्थी रहा. कंपनी को अब तक 1,157 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग मिली, जो सभी एयरलाइंस में सबसे अधिक है.
वहीं, एयरपोर्ट विकास के मामले में अयोध्या एयरपोर्ट को सबसे ज्यादा सरकारी फंड मिला. इसके विकास पर 347 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो UDAN योजना के तहत किसी भी एयरपोर्ट को दी गई सबसे बड़ी राशि है.
आरटीआई में यह भी बताया गया है कि UDAN योजना के तहत अब तक 185 एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है. योजना का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना और आम लोगों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ एवं किफायती बनाना है.
अशोक उपाध्याय