भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है. अगले 48 घंटों के भीतर दो गैस टैंकर- BW Tyr और BW Elm इस अहम समुद्री मार्ग को पार कर मुंबई और मंगलुरु पहुंचने वाले हैं. होर्मुज में हर हलचल का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है. ऐसे में भारतीय नौसेना की सतर्कता और रणनीतिक तैनाती इस चुनौतीपूर्ण समय में देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर सामने आई है.
जरूरत पड़ने पर भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना के युद्धपोत तैयार हैं. इससे पहले इसी मार्ग से चार जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं. हालांकि, होर्मुज में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है. फिलहाल यहां 18 भारतीय जहाज अब भी फंसे हुए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के वक्त इस क्षेत्र में भारत के 24 जहाज मौजूद थे. भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, ताकि भारतीय ध्वज वाले और भारत की ओर आने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके.
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नौसेना ने इसे 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' नाम दिया है. इसका उद्देश्य वैश्विक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना है. नौसेना के फ्रंटलाइन डिस्ट्रॉयर पर तैनात जवानों के लिए यह मिशन बेहद संवेदनशील है. डिस्ट्रॉयर पर लगे रडार स्क्रीन पर दर्जनों जहाजों की हलचल नजर आ रही है, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं.
वहीं, इस क्षेत्र में फंसे 18 भारतीय जहाजों पर सवार करीब 500 नाविकों के लिए यह इंतजार बेहद कठिन हो गया है. सीमित संसाधनों के बीच वे अपने परिवारों से छोटी-छोटी सैटेलाइट कॉल्स के जरिए संपर्क बनाए हुए हैं. मुंबई, कोच्चि और विशाखापट्टनम में बैठे उनके परिवार लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहे हैं. होर्मुज पार करके भारत आ रहे दोनों गैस टैंकरों में करीब 94,000 टन एलपीजी है, जिससे देश की लगभग तीन दिनों की घरेलू गैस जरूरत पूरा होगी.
मंजीत नेगी