संसदीय कमेटी तक सुशांत केस की आंच, मेडिकल रिपोर्ट्स पर मंथन संभव

सुब्रमण्यम स्वामी लगातार सुशांत मामले को लेकर एक्टिव हैं और सवाल खड़े कर रहे हैं. बीते दिनों सुब्रमण्यम स्वामी ने मांग की थी कि स्वास्थ्य मंत्रालय को एक मेडिकल बोर्ड बनाना चाहिए, जो कि एम्स पैनल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की जांच करे.

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मेडिकल रिपोर्ट्स पर उठे हैं सवाल (फाइल फोटो) मेडिकल रिपोर्ट्स पर उठे हैं सवाल (फाइल फोटो)

राहुल श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST
  • संसदीय पैनल कर सकता है सुशांत केस पर मंथन
  • सुब्रमण्यम स्वामी ने खड़े किए थे सवाल

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच सीबीआई कर रही है. सीबीआई ने एम्स के डॉक्टरों का एक पैनल बनाया था, जिसे सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमॉर्टम और अन्य रिपोर्ट्स को परखना था. जल्द ही सीबीआई इस मामले में अपनी फाइनल रिपोर्ट सब्मिट कर देगी. लेकिन इससे पहले संसदीय कमेटी में ये मसला उठ सकता है. राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मसले को संसदीय कमेटी और स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने उठाया था. 

सुब्रमण्यम स्वामी लगातार सुशांत मामले को लेकर एक्टिव हैं और सवाल खड़े कर रहे हैं. बीते दिनों सुब्रमण्यम स्वामी ने मांग की थी कि स्वास्थ्य मंत्रालय को एक मेडिकल बोर्ड बनाना चाहिए, जो कि एम्स पैनल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की जांच करे. इसके अलावा उन्होंने एम्स पैनल के इनपुट्स पर भी सवाल खड़े किए थे. सुब्रमण्यम स्वामी चाहते हैं कि सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट आने से पहले मेडिकल बोर्ड इस मामले की जांच करे.

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इसके बाद ही सुब्रमण्यम स्वामी ने स्वास्थ्य मामलों की संसदीय कमेटी को इस बारे में लिखा था, जिसके बाद पैनल की ओर से स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया गया था कि वो सुब्रमण्यम स्वामी के साथ सभी जानकारी साझा करें. 

सूत्रों की मानें, तो सुब्रमण्यम स्वामी के द्वारा उठाए गए सवालों के बाद उनसे एम्स पैनल के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने सुब्रमण्यम स्वामी के उन पांच सवालों के बारे में चर्चा की जो स्वामी लगातार उठा रहे हैं. 

आपको बता दें कि संसदीय पैनल में इसके अलावा एक और मामला उठा है. इन्फॉर्मेशन मामलों की संसदीय कमेटी के सामने हाल ही में सामने आए टीआरपी स्कैम को लेकर चर्चा हुई.

इस पूरे विवाद को लेकर मंत्रालय के अधिकारी द्वारा संसदीय पैनल को ब्रीफ किया गया, जिसमें कहा गया कि मौजूदा टीआरपी सिस्टम पुख्ता नहीं है. संसदीय पैनल की ओर से फेक न्यूज़, फर्जी टीआरपी और अन्य मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई. 

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