पश्चिम बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड और ओडिशा के जज भी निपटाएंगे 80 लाख केस

बंगाल में SIR प्रक्रिया को तेज करने और करीब 80 लाख 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' और 'अनमैप्ड' श्रेणी के मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक कदम उठाया है. कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की अनुमति दी है, जिसमें पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के सेवारत तथा सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी भी शामिल किया जा सकेगा.

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बंगाल एसआईआर को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला. (File photo: ITG) बंगाल एसआईआर को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला. (File photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में ममता बनर्जी और अन्य की अर्जियों पर सुनवाई करते हुए न्यायिक संसाधनों को बढ़ाने का आदेश दिया है. कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट के अनुसार 50 लाख से अधिक आवेदन लंबित हैं, जिन्हें निपटाने के लिए अब झारखंड और ओडिशा के सेवानिवृत्त और मौजूदा न्यायाधीशों की भी मदद ली जाएगी.

अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि नाम शामिल करने की प्रक्रिया नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक जारी रहेगी. माध्यमिक शिक्षा सर्टिफिकेट और आधार कार्ड को सत्यापन के लिए वैध दस्तावेज माना गया है.

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जजों की कमी

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के पास वर्तमान में 220 एडीजे स्तर के न्यायाधीश उपलब्ध हैं, यदि एक अधिकारी प्रतिदिन 200 मामलों की सुनवाई करता है तो भी सभी आपत्तियों को निपटाने में कम से कम 80 दिन लगेंगे.

इसी तार्किक विसंगति को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल के अनुभव वाले सिविल जजों के उपयोग की अनुमति दी है. इसके अतिरिक्त झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, ताकि 80 लाख से अधिक बेमेल जानकारी वाले मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके.

विशेष शक्तियों को इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया है. अदालत का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में शुद्धता सुनिश्चित करना और भारी संख्या में लंबित आवेदनों को समय सीमा के अंदर निपटाना है.

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कल्याण बनर्जी ने जताई आपत्ति

इस पर कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर पड़ोसी राज्य अधिकारी भेजते हैं तो उनके पास एक ही भाषा की समस्या हो सकती है. तो सीजेआई ने कहा कि झारखंड, ओडिशा एक समय बंगाल का हिस्सा थे. वे अभी भी भाषा समझ सकते हैं.

वहीं, चुनाव आयोग ने कोर्ट को सूचित किया कि एसआईआर चुनाव की अंतिम तिथि तक चल सकता है. हम अनुपूरक सूचियों (सप्लीमेंट्री) के लिए समय-सीमा बढ़ा रहे हैं. ये प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. इसे 20 फरवरी को प्रकाशित माना जाएगा, लेकिन नामांकन से 10 दिन पहले तक नाम जोड़ने का काम चलता रहेगा. फाइनल इलेक्टोरल रोल के प्रकाशन की आखिरी तारीख 28 फरवरी तय की गई है.

कोर्ट ने आदेश दिया कि 14 फरवरी से पहले इलेक्ट्रॉनिक या फिजिकल माध्यम से जमा किए गए सभी दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे. सप्लीमेंट्री लिस्ट को भी मुख्य फाइनल इलेक्टोरल रोल का हिस्सा माना जाएगा.

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