दुख, अकेलापन और विलाप... वायनाड के राहत शिविरों में पसरी कलेजा चीर देने वाली शांति

वे लोग जिनसे वो प्यार जताया करते थे और जो आंखों के तारे थे वह या तो अब तक लापता हैं या फिर उस रोज आए भूस्खलन की भेंट चढ़ गए. उनकी गाढ़ी कमाई अब मलबों के नीचे दबकर मलबा ही हो चुकी है. ये अंदाजा लगा पाना कठिन है कि उन लोगों के लिए उस काली रात की सुबह कैसी रही होगी, जिन्होंने उस दिन का सूरज अपने जीवन में छा गए गहरे अंधकार में देखा.

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वायनाड राहत शिविर में पसरा है दुख भरा सन्नाटा वायनाड राहत शिविर में पसरा है दुख भरा सन्नाटा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

केरल के वायनाड में मेप्पादी के राहत शिविरों में उदासी छायी हुई है. यहां जिस तरह की शांति पसरी हुई है, वह कलेजा चीर देने वाली है और ये शांति तब और डरावनी हो जाती जब इस माहौल को उन लोगों की सिसकियां और करुण चीखें भंग कर देती हैं, जिन्होंने बीते मंगलवार को इस क्षेत्र में हुए विनाशकारी भूस्खलन में अपना सब कुछ खो दिया था. जो बच गए हैं, वह अभी भी इस बात की कल्पना नहीं कर पा रहे हैं कि वह ऐसे भीषण हादसे से गुजर चुके हैं, जिसने उनसे उनका सब कुछ छीन लिया है. सब कुछ यानी, घर-परिवार और रिश्ते.

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मलबों में दब गए रिश्ते और गाढ़ी कमाई
वे लोग जिनसे वो प्यार जताया करते थे और जो आंखों के तारे थे वह या तो अब तक लापता हैं या फिर उस रोज आए भूस्खलन की भेंट चढ़ गए. उनकी गाढ़ी कमाई अब मलबों के नीचे दबकर मलबा ही हो चुकी है. ये अंदाजा लगा पाना कठिन है कि उन लोगों के लिए उस काली रात की सुबह कैसी रही होगी, जिन्होंने उस दिन का सूरज अपने जीवन में छा गए गहरे अंधकार में देखा. शिविरों में रह रहे ये पीड़ित अभी भी नहीं मान पा रहे हैं कि अब यही दुख उनका जीवन है, और इसकी कोई भरपायी नहीं हो सकती है.

जो शरीर पर है, कपड़ों के नाम पर बस वही बचा
वह लोग अब भाव से शून्य हैं और आंखें किसी उम्मीद से परे हैं. वह अगर कुछ देख भी पा रही हैं तो सिर्फ अपना अनिश्चित भविष्य. एक जीवित बचे व्यक्ति ने रोते हुए कहा, "मुझे नहीं पता कि क्या करना है. हमारे पास जो कुछ भी था वह सब हमने खो दिया. हमारे पास बस वही है जो हमने अभी पहना है."  

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अचानक ही रो पड़ती हैं बच्चों को खो देने वाली माताएं 
वो माताएं, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया और उनकी गोद अब सूनी हैं, वह अपने आप को सबसे अधिक लुटा हुआ महसूस कर रही हैं. उनके हाथ अनायास ही बार-बार उस मुद्रा में आ जाते हैं कि जैसे मां किसी दुधमुंहे को गोद में लेती हैं, लेकिन जब उन हाथों में फूल सा कोमल भार भी महसूस नहीं होता तो वह फूट-फूट कर रो देती हैं. यह रोना, ये विलाप ही राहत शिविर में सांय-सांय बह रही हवा की आवाज है और इसमें जो नमी है, वह इन माताओं की आंखों से बहे पानी की वजह से ही है. 

कहीं जवान बेटे-बेटियों का शोक तो कहीं अनाथ हो जा ने का गम
बुजुर्ग पिता अपने जवान बेटों-बेटियों के लिए शोक में हैं. किसी परिवार ने अपने दादा-दादी, चाचा-चाची जैसे सभी रिश्ते खो दिए. कोई ऐसा है जो कल तक एक भरे-पूरे परिवार में था और आज अकेला है. सोच रहा है, कि वह क्यों बच गया. शिविर में जितने चेहरे उतने दर्द और दर्द ऐसा जिसकी कोई दवा नहीं.

मेप्पादी के पास 17 राहत शिविर में रखे गए लोग
राज्य सरकार ने मेप्पादी के पास लगभग 17 राहत शिविर बनाए हैं, जहां मुंडक्कई में विनाशकारी भूस्खलन से प्रभावित 707 परिवारों के 2,597 लोगों को रखा गया है. राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिले भर में कुल 91 शिविर खोले गए हैं, जिनमें 2,981 परिवारों के 9,977 लोग रहते हैं. बचे लोगों को उनके नुकसान से निपटने में मदद करने के लिए, राज्य सरकार ने बचे लोगों को मनेवैज्ञानिक सपोर्ट देने के लिए करने के लिए एक मानसिक स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन टीम का गठन किया है. इस आपदा में 210 से अधिक लोगों की जान चली गई और लगभग इतने ही लोग अभी भी लापता हैं.

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लोगों को मनोवैज्ञानिक सपोर्ट देने के लिए टीम गठित
मनोचिकित्सकों, नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिकों, मनोचिकित्सक सामाजिक कार्यकर्ताओं और परामर्शदाताओं की 121 सदस्यीय टीम राहत शिविरों और विभिन्न अस्पतालों में भर्ती लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है. टीम स्वास्थ्य कर्मियों और बचाव कर्मियों के साथ-साथ पुलिस, राजस्व अधिकारियों, स्थानीय स्व-सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों को परामर्श भी प्रदान कर रही है जो आपदा के भयानक परिणाम का सामना कर रहे हैं. राज्य सरकार ने खोज एवं बचाव अभियान की निगरानी के लिए चार मंत्रियों की एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया है.

शिविरों में भोजन की उपलब्धता और साफ-सफाई पर दिया जा रहा है ध्यान
शुक्रवार को मीडिया से मुलाकात करने वाले मंत्रियों ने जनता और मीडिया से शिविरों में अनावश्यक दौरे न करने और विस्थापित व्यक्तियों की गोपनीयता का सम्मान करने को कहा है. मंत्रियों ने कहा, "शिविरों में आवश्यक चिकित्सा टीमों सहित नोडल अधिकारी और अन्य अधिकारी हैं. राहत केंद्रों के अंदर अच्छे भोजन और साफ-सफाई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है."

अब तक 210 शव हुए बरामद
आपदा के तीन दिन बाद शुक्रवार को बचावकर्मियों को 14 शव मिले, जिनमें से तीन मलप्पुरम जिले से बरामद किए गए. अब तक कुल 210 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 85 महिलाएं, 96 पुरुष और 29 बच्चों के शव शामिल हैं. सरकार ने अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं. कई लोग लापता हैं, और बचावकर्मी जलजमाव वाली मिट्टी सहित प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, क्योंकि वे नष्ट हुए घरों और इमारतों में जीवित बचे लोगों और शवों की तलाश कर रहे हैं.

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