'PM मोदी ने संभव कर दिखाया,' शेहला राशीद ने फिर की केंद्र सरकार की तारीफ

जासूसी की आरोपों में कतर की जेल में बंद आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की रिहाई के बाद शेहला राशीद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर प्रसाद की जमकर प्रशंसा की है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

जासूसी की आरोपों में कतर की जेल में बंद आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की रिहाई के बाद भारत की कूटनीति की हर ओर चर्चा हो रही है. इसी को लेकर अब शेहला राशीद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर प्रसाद की जमकर प्रशंसा की है और कहा है कि पीएम मोदी और विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर प्रसाद ने एक बार फिर असंभव-सी दिखने वाली बातों को संभव कर दिखाया है.

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'मोदी ने असंभव को किया संभव'

शेहला राशीद ने अपने कतर से रिहाई के बाद भारत लौट एक नागरिक की वीडियो को साझा करते हुए लिखा कि मौत की सजा से लेकर घर वापसी तक, ये भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है और ये इसका सर्टिफिकेट है कि हमारी विदेश नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सक्षम हाथों में है. पीएम मोदी और विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर प्रसाद, जिन्होंने एक बार फिर असंभव को संभव कर दिखाया है. वतन वापस लौट लोगों के परिवार को बधाई.

सरजमीं लौट पूर्व नौसैनिक

कतर की जेल में जासूसी का आरोपों में जेल में बंद पूर्व 8 नौसैनिकों की रिहाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कतर की जेल में बंद 8 नागरिकों को रिहा कर दिया गया है और इनमें से सात नागरिक भारत भी लौट आए हैं. वहीं, कतर से लौट पूर्व नौसैनिकों ने अपनी सरजमीं पर वापसी करते ही भारत माता की जय के नारे लगाए.

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पीएम मोदी के हस्तक्षेप से हुई रिहाई: नौसैनिक 

कतर से भारत लौटे नौसेना के अधिकारी ने अपनी वापसी पर कहा कि पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बिना हमारा फिर से वापस लौटना संभव नहीं था. भारत सरकार ने लगातार हमारी रिहाई के लिए लगातार प्रयास किए थे. कतर से लौटे नौसेना के दिग्गजों में से एक का कहना है, हमने भारत वापस आने के लिए लगभग 18 महीने तक इंतजार किया. हम पीएम के बेहद आभारी हैं. यह उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप और कतर के साथ उनके समीकरण के बिना संभव नहीं होता. हम भारत सरकार द्वारा किए गए हर प्रयास के लिए तहे दिल से आभारी हैं और उन प्रयासों के बिना यह दिन संभव नहीं होता.

साल 2022 में हुई थी गिरफ्तारी

बता दें कि इन सभी आठ पूर्व भारतीय सैनिकों को जासूसी के आरोपों में अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था और 26 अक्टूबर, 2023 को कतर की एक अदालत ने सभी को मौत की सजा सुनाई थी. इसके बाद भारतीय सरकार ने नागरिकों की रिहाई के लिए कानूनी विकल्प तलाशना शुरू कर दिया था और पिछले साल 1 दिसंबर को दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल-थानी के बीच बैठक के बाद पूर्व नौसैनिकों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. 

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