इजरायल ने कहा है कि क्या भारत चाहता है कि उसके यहां भोजन कब बने ये ईरान तय करे. निश्चित रूप से भारत ऐसा नहीं चाहता होगा. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ईरान जंग पर विस्तार से बात की. नई दिल्ली में चल रहे इंडिया टुडे कॉनक्लेव में राजूदत रूवेन अजार ने कहा कि जंग शुरू होने के बाद इजरायल ईरान के 15000 सैन्य टारगेट पर हमला कर चुका है.
उन्होंने कहा कि इजरायल के ऑपरेशन का उद्देश्य हमारे अस्तित्त्व का खतरा बन चुके दो ईरानी फैक्टर को खत्म करना था. पहला खतरा उनके विशाल बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से था. ईरानी ऐसी करीब 20,000 मिसाइलें बनाने वाले थे, जिनकी मदद से वे इस इलाके के किसी भी देश को, यहां तक कि इज़रायल को भी पूरी तरह तबाह कर सकते थे. और दूसरा खतरा उनका परमाणु प्रोग्राम था. हमने इन दोनों बड़े खतरों को तबाह कर दिया.
उनके पास एयरफोर्स नहीं है, नेवी नहीं है, उनके प्रोडक्शन साइट तबाह कर दिए गए हैं. उनकी हम पर फायर करने की क्षमता में गिरावट आई है, हम उनकी कैपेसिटी घट गई है. जून में उन्होंने 30 बल्डिंग पर हमला किया था. इस बार वे मात्र 2 बिल्डिंग पर निशाना बना सके हैं. जून के मुकाबले के इस बार इजरायल का नुकसान 10 गुणा कम है.
इंडिया टुडे कॉनक्लेव में राजूदत रूवेन अजार ने कहा कि हम पूरे मिडिल ईस्ट में हमला नहीं करने जा रहे हैं. हम अपनी रक्षा कर रहे हैं क्योंकि हम अपने देश की चिंता करते हैं. उन्होंने कहा कि आपने देखा कि जंग के दौरान भी हमारा शेयर बाजार छलांग लगा रहा था. इजरायल मानवता को बेहतर बनाने के लिए काम करता है. लेकिन अगर कुछ ताकतें हमें खत्म करना चाहती हैं तो हम उन्हें मिटाने से पीछे नहीं हटेंगे. और अगर हम इसमें सफल होते हैं तो न सिर्फ हम सुरक्षित रहेंगे बल्कि भारत भी सुरक्षित रहेगा.
भारत कैसे सुरक्षित रहेगा इसे समझाते हुए राजूदत रूवेन अजार ने कहा कि क्या आप ऐसी स्थिति में फंसना चाहते हैं कि जब ईरानी ये तय करे कि भारत में अगला खाना कब पकेगा ये ईरान तय करेगा. क्या आप ऐसा चाहते हैं? अगर ईरानी हमला करने का फैसला लेते हैं तो ये स्थिति पैदा होगी. देखिए वे जनसंहार के हथियारों के साथ तैयार हैं, लेकिन वे चाहेंगे कि आप आंख मूंद लें. उसको इग्नोर करें और आप अपनी कल्पना की दुनिया में रह सकते हैं ये सोचते हुए कि कुछ नहीं होगा. लेकिन मेरा यकीन मानिए. ईरान हम पर पिछले 40 सालों से हमला कर रहे हैं. तो क्या आप चाहते हैं कि आपका कथित मित्र ये तय करे कि आप अपना अगला खाना कब बनाएं. ये आपके दोस्त हैं, शत्रु नहीं. निश्चित रूप से आप ऐसी स्थिति में नहीं आना चाहेंगे.
रूवेन अजार ने कहा कि, "ईरान की प्रॉक्सी सेना जमा हो रही थी और इजरायल को तबाह करना चाहती थी और तेहरान बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार बनाने की अपनी क्षमता को छिपाने वाला था. ठीक इसी मोड़ पर हमने मिलकर यह फैसला किया कि अब कार्रवाई की जाए. "
ईरानी प्रशासन को "आतंकवादी शासन" बताते हुए राजदूत अज़ार ने कहा कि इजरायल को ये पक्का नहीं पता कि यह शासन बदलेगा या नहीं, लेकिन हमने दो बड़े खतरों को हटा दिया है और यह शासन काफी कमजोर होता जा रहा है.
उन्होंने कहा उनकी हालत ठीक नहीं है. उनके पास न तो कोई नौसेना है और न ही कोई वायुसेना. हम सही रास्ते पर हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि इजरायल ने अब तक ईरान में लगभग 15,000 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. ये हमले उस अभियान की शुरुआत के बाद से किए गए हैं जिसे इज़राइल 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' कहता है; यह अभियान 28 फ़रवरी को शुरू हुआ था.
उन्होंने आगे कहा कि इजरायल का उद्देश्य या तो तेहरान को अपना रुख बदलने पर मजबूर करना है, या फिर इजरायल पर हमला करने की उसकी क्षमता को हमेशा के लिए कमजोर कर देना है.
उन्होंने कहा, "हम ऐसी स्थिति में पहुंचना चाहते हैं, जहां इन दोनों में से कोई एक बात हो. या तो ईरानी अपना रुख बदल लें, और दूसरा विकल्प यह है कि हम हम पर हमला करने की उनकी क्षमता को इस हद तक खत्म कर दें कि हम इस युद्ध को समाप्त कर सकें, और जब भी हमें लगे कि वे अपने हथियारों को फिर से तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, तो हम उन पर लगातार हमले करते रहें."
अजार ने ईरान की इस बात के लिए भी आलोचना की कि वह पूरे क्षेत्र में जिसमें मध्य पूर्व के शिपिंग रास्ते और बुनियादी ढांचा भी शामिल हैं, अलग-अलग हितों को निशाना बनाकर संघर्ष को बढ़ा रहा है.
उन्होंने कहा, “यह बात बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईरानियों ने उन लोगों को भी निशाना बनाने का फैसला किया, जिन्हें वे अपना दोस्त होने का दावा करते हैं. लेकिन यह कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि पिछले तीन-चार दशकों से वे हमारे क्षेत्र में आतंक फैला रहे हैं और जबरदस्ती वसूली कर रहे हैं.”
उनके अनुसार, ईरान की इन हरकतों का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दखल देने और इज़रायल तथा अमेरिका को रोकने के लिए मजबूर करना था, लेकिन इसका नतीजा बिल्कुल उल्टा निकला.
इजरायली राजदूत ने कहा कि हम ये तय करेंगे मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आ सकें. अगर वे अपने लोगों के साथ ऐसा कर रहे हैं तो सोचिए हमारे साथ कैसा करेंगे. उन्होंने कहा कि जितनी ये सरकार कमजोर होगी उतना ही इस क्षेत्र में समृद्धि की संभावना है. अंत में ईरान एक कमजोर शासन बचेगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में इजरायली राजदूत ने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को स्टैबलाइज करना चाहते हैं तो हो सकता है वे वहां कुछ सैनिक भेजें.
उन्होंने कहा कि 2027 तक ईरान इजरायल को पूरी तरह से खत्म करना चाहता था. लेकिन अब हम उसे और उसके प्रॉक्सीज को धीरे धीरे खत्म कर रहे हैं. हिज्बुल्लाह की ताकत हमने खत्म कर दी है, वे फायर कर रहे हैं लेकिन वे इतना नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं.
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