सोना, चांदी, कीमती रत्न... 48 साल बाद पुरी के जगन्नाथ मंदिर में क्या खोजने पहुंचे RBI अफसर?

ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में 48 साल बाद रत्न भंडार की गिनती का शुभ मुहूर्त बुधवार दोपहर 12:09 बजे से शुरू हुआ. इस प्रक्रिया में मंदिर के आभूषणों की सूची तैयार की जाएगी, जिसमें सोना, चांदी और कीमती रत्न शामिल हैं.

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ओडिशा पुरी के जगन्नाथ मंदिर में रत्न भंडार में मौजूद खजाने की इन्वेंट्री बन रही है ओडिशा पुरी के जगन्नाथ मंदिर में रत्न भंडार में मौजूद खजाने की इन्वेंट्री बन रही है

अजय कुमार नाथ

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST

ओडिशा के पुरी में मौजूद भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का रहस्य सामने आने वाला है. रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात हैं इसे लेकर हमेशा से दिलचस्पी बनी रही है. अब बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद से शुभ मुहूर्त में रत्न भंडार में क्या-क्या और कितना है इसकी लिस्टिंग (इन्वेंट्री) तैयार करने का काम शुरू हो चुका है. 

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शुभ मुहूर्त में शुरू हुई गिनती
बता दें कि शुभ समय दोपहर 12.09 बजे से 1.40 बजे के बीच का था. इस दौरान मंदिर की परंपराओं का पालन करते हुए आभूषणों की गिनती शुरू हुई. इससे पहले ये गिनती साल 1978 में हुई थी. इसके 58 साल बाद अब दोबारा ये गिनती हो रही है. उस दौरान 128 किलो सोने के आभूषण और 221 किलो चांदी के आभूषण थे. अधिकारियों ने जानकारी दी कि जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित सूची (इन्वेंट्री) तैयार करने का प्रोसेस बुधवार को 48 साल बाद शुरू हो गया है.

पारंपरिक कपड़ों में ही मंदिर प्रवेश की अनुमति
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, इसके लिए निर्धारित कर्मचारी सुबह करीब 11:30 बजे पारंपरिक धोती और गमछा पहनकर मंदिर में प्रवेश किए. यह इन्वेंट्री प्रोसेस निर्धारित शुभ मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से 1:45 बजे के बीच शुरू किया गया. जिसमें केवल सिर्फ वही जा सकते हैं, जिन्हें इस गिनती और लिस्टिंग के लिए अधिकृत किया गया है. 

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तैयार की गई है SOP
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोसेस के दौरान 12वीं सदी के इस मंदिर में दैनिक पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं होगा. श्रद्धालुओं को ‘बाहरा कथा’ (मंदिर के अंदर बाहरी बैरिकेड) से दर्शन की अनुमति दी गई है, जबकि ‘भीतरा कथा’ क्षेत्र में इस दौरान एंट्री बैन रहेगी. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति द्वारा तैयार SOP के अनुसार ही जांच और गिनती होगी. इस SOP को राज्य सरकार की मंजूरी मिली है. इसके अनुसार इन्वेंट्री की शुरुआत रोजाना पूजा में उपयोग होने वाले आभूषणों से होगी. इसके बाद रत्न भंडार के बाहरी कक्ष और अंत में आंतरिक कक्ष को खोला जाएगा.

आखिरी बार यह सूची 13 मई से 23 जुलाई 1978 के बीच तैयार की गई थी. उस समय 128.38 किलोग्राम वजनी 454 सोने-मिश्रित वस्तुएं और 221.53 किलोग्राम वजनी 293 चांदी-मिश्रित वस्तुएं, साथ ही कई कीमती रत्न दर्ज किए गए थे. जहां 1978 की प्रक्रिया को पूरा होने में 72 दिन लगे थे, वहीं अधिकारियों का कहना है कि इस बार आधुनिक तकनीक की मदद से इसे कम समय में पूरा कर लिया जाएगा.

RBI अफसर भी मौजूद
इन्वेंट्री के दौरान दो जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ) वस्तुओं की पहचान में सहयोग कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटोग्राफी की जा रही है. सोने के आभूषणों को पीले कपड़े, चांदी के आभूषणों को सफेद कपड़े और अन्य वस्तुओं को लाल कपड़े में लपेटकर छह विशेष रूप से तैयार संदूकों में रखा जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में मंदिर के सेवायत, सरकारी बैंकों के अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.
 

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