'सतलुज' बैन से गरमाई सियासत, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, अमृतसर में SGPC ने निकाला मार्च

पंजाब में ओटीटी प्लेटफॉर्म से पंजाबी फिल्म 'सतलुज' हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अमृतसर में फिल्म पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला.

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अमृतसर में SGPC ने फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर मार्च किया अमृतसर में SGPC ने फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर मार्च किया

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST

भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म से पंजाबी फिल्म 'सतलुज' (पहले 'पंजाब 95') हटाए जाने के कुछ दिनों बाद पंजाब में विवाद और गहरा गया है. शुक्रवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने फिल्म पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर अमृतसर में शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला.

यह मार्च श्री दरबार साहिब से शुरू होकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचा, जहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया. इस विरोध प्रदर्शन के साथ ही मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के अपहरण और हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. साथ ही इस मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व डीएसपी जस्पाल सिंह की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.

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सतलुज पर लगे बैन को हटाने की मांग

एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मार्च का नेतृत्व किया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब के कठिन दौर की सच्चाई दुनिया के सामने रखने का साहस दिखाया था. उन्होंने मांग की कि फिल्म 'सतलुज' पर लगाया गया बैन तुरंत हटाया जाए ताकि नई पीढ़ी उस दौर की वास्तविक घटनाओं को जान और समझ सके.

धामी ने यह भी घोषणा की कि 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इसमें अरदास, सुखमनी साहिब का पाठ और कीर्तन होगा. उन्होंने यह मांग भी उठाई कि धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों की निष्पक्ष समीक्षा तय करने के लिए सेंसर बोर्ड में एसजीपीसी के एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाए.

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इस बीच पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है, जिसमें ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाई गई फिल्म 'सतलुज' को भारत में दोबारा उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग की गई है. 

मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं. शिरोमणि अकाली दल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर दोषियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है. अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि सरकार ने पहले 2022 में सजा में राहत की सिफारिश की, जिससे रिहाई का रास्ता खुला, और अब उनके ठिकाने का पता लगाने में भी नाकाम रही है.

वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई को मंजूरी नहीं दी गई थी और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए.
 

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