'देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा', CMs को पीएम मोदी का साफ संदेश, मिडिल ईस्ट संकट पर हुई चर्चा

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तेल सप्लाई पर मंडराते संकट को देखते हुए पीएम मोदी और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक की है. करीब दो घंटे तक चली इस बैठक का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल और जरूरी सामानों की सप्लाई न रुके और आम जनता पर इसका बोझ न पड़े.

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पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बड़ी बैठक आज (Photo: ITG) पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बड़ी बैठक आज (Photo: ITG)

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

वेस्ट एशिया संकट को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच अहम वर्चुअल मीटिंग हुई. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के खतरे को देखते हुए बुलाई गई यह बैठक करीब दो घंटे तक चली. इस बैठक में पीएम मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साफ संदेश देते हुए कहा कि हमें टीम इंडिया की तरह काम करना है. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने मीटिंग में यह भी कहा कि मौजूदा संकट की वजह से देश में कोई लॉकडाउन नहीं लगेगा.

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पीआईबी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, एनर्जी सिक्योरिटी को सुनिश्चित करना और नागरिकों के हितों की रक्षा करना है. साथ ही उन्होंने सप्लाई चेन को मजबूत करने की भी बात कही. इसके लिए पीएम मोदी ने राज्यों से जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की. 

पीएम मोदी ने गलत सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार के खिलाफ चेतावनी दी और सटीक और विश्वसनीय जानकारी के प्रसार पर जोर दिया है. मुख्यमंत्रियों ने भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार की तरफ से स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की.मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया है कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ हालात सामान्य बने हुए हैं.

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चुनावी राज्यों के CM बैठक में नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस वर्चुअल बैठक में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हो सके. इन 5 राज्यों में चुनाव की वजह से आचार संहिता लागू है, जिसके चलते वे इस चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाए.

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राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई इस बैठक में मिडिल ईस्ट के तनाव और ईरान युद्ध के बीच ईंधन की सप्लाई, बढ़ती महंगाई और रसद व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर गंभीर चर्चा हुई. सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों की स्थिति और तैयारियों की जानकारी पीएम मोदी को दी ताकि वैश्विक संकट का असर आम जनता पर न पड़े.

इस हाई-लेवल मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ देश के कई बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए. बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय मौजूद रहे. इनके अलावा दक्षिण भारत से चंद्रबाबू नायडू और रेवंत रेड्डी, जबकि पंजाब से भगवंत मान और जम्मू-कश्मीर से उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी बात रखी. वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गुजरात के भूपेंद्र पटेल और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस ने भी चर्चा में हिस्सा लेकर अपने-अपने राज्यों की तैयारियों का ब्योरा दिया.

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'आम आदमी पर आंच न आए'

पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले ही देश को आगाह किया था कि मिडिल ईस्ट का यह संकट भारत के लिए लंबी मुसीबतें खड़ी कर सकता है. केंद्र सरकार अपनी तरफ से हर मुमकिन कदम उठा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को कामयाब बनाने की असली जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर है. इसलिए,  उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे अपने-अपने राज्यों में ऐसी व्यवस्था करें जिससे आम आदमी की जरूरत की चीजों पर कोई आंच न आए. उन्होंने याद दिलाया कि जब देश संकट में होता है, तो केंद्र और राज्यों को मिलकर एक परिवार की तरह लड़ना पड़ता है.

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प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति की तुलना ठीक 6 साल पहले आई कोरोना महामारी से की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह कोविड-19 के दौरान केंद्र और राज्यों ने 'टीम इंडिया' बनकर काम किया था, आज फिर उसी जज्बे की जरूरत है. आपको याद होगा कि मार्च 2020 में जब पूरी दुनिया थम गई थी, तब पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ लगातार मीटिंग्स का सिलसिला शुरू किया था. उस वक्त पहली मीटिंग 20 मार्च 2020 को हुई थी, जिसके ठीक चार दिन बाद देश में तीन हफ्ते का लॉकडाउन लगा था. उस मुश्किल दौर में  उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा बार मुख्यमंत्रियों से बात की थी ताकि टेस्टिंग, ट्रैकिंग और इलाज में कोई कमी न रहे.

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2021 में जब वैक्सीनेशन का दौर आया, तब भी पीएम मोदी ने संघीय ढांचे की मजबूती पर भरोसा जताया था. उन्होंने राज्यों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन देने का एलान किया था. उन्होंने साफ कहा था कि वैक्सीन पर किसी भी राज्य सरकार को एक पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. उस समय राज्यों ने भी राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र का साथ दिया था, जिसकी तारीफ पीएम मोदी ने खुद अपने एक लेख में भी की थी. उन्होंने इसे भागीदारी का एक नया मॉडल बताया था.

आज जब मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ने और सप्लाई चेन टूटने का डर सता रहा है, तो पीएम मोदी का राज्यों को पुकारना दिखाता है कि भारत की असली ताकत उसकी एकजुटता में है. 'टीम इंडिया' का यह नया मंत्र आज की बैठक में सबसे बड़ा हथियार बनने वाला है. सरकार की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट की आग की लपटें भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की रसोई तक न पहुंचें.

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