प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 51वीं 'प्रगति' (Pro-Active Governance and Timely Implementation) बैठक की अध्यक्षता करते हुए देशभर की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा की. बैठक में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्रों से जुड़ी सात प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई, जिनकी कुल लागत लगभग 30,000 करोड़ रुपये है.
ये परियोजनाएं 9 राज्यों में संचालित हो रही हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी से लागत बढ़ती है और आम नागरिक विकास के लाभों से वंचित हो जाते हैं, इसलिए सभी राज्यों और एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना चाहिए.
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा रीवर लिंकिंग प्रोजेक्ट की भी समीक्षा की. उन्होंने इसे राज्यों के बीच जल विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का एक आदर्श मॉडल बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल उपलब्धता में बड़ा सुधार होगा तथा बुंदेलखंड क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा. उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे आपसी समन्वय और सहमति के माध्यम से जल संसाधन प्रबंधन को आगे बढ़ाएं.
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 की प्रगति की भी समीक्षा की गई. प्रधानमंत्री ने राज्यों को ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं, विशेष रूप से वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और GOBARdhan प्लांट्स के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन शहरी जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए बेहद जरूरी हैं. प्रधानमंत्री की सलाह पर राज्यों में सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा प्रणाली भी शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन से की गई है.
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों, आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक संस्थानों में रूफटॉप सोलर ऊर्जा परियोजनाओं को मिशन मोड में लागू करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा न केवल स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि इससे बिजली खर्च में भी कमी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.
पीयूष मिश्रा / हिमांशु मिश्रा / चेतन भूटानी