RSS से जुड़ाव, दक्षिण की पॉलिटिक्स का लंबा अनुभव... जाने कौन हैं देश के नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

सीपी राधाकृष्णन के चाचा सीके कुप्पुसामी, भी तीन बार कांग्रेस सांसद रहे हैं. राधाकृष्णन का परिवार पिछले 25 वर्षों से राजनीति में है. सीपीआर 1974 में जनसंघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य चुने गए थे. जानिए भारत के नए निर्वाचित उपराष्ट्रपति के बारे में.

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सीपी राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति चुने गए हैं. जब वह NDA की ओर से उम्मीदवार बनाए गए थे, तब उन्होंने नई दिल्ली के आरके पुरम स्थित उत्तरा स्वामी मलाई मंदिर में पूजा की थी (Photo- PTI) सीपी राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति चुने गए हैं. जब वह NDA की ओर से उम्मीदवार बनाए गए थे, तब उन्होंने नई दिल्ली के आरके पुरम स्थित उत्तरा स्वामी मलाई मंदिर में पूजा की थी (Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 8:24 PM IST

सीपी राधाकृष्णन, भारत के नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति बन गए हैं. मंगलवार को हुई वोटिंग में उन्हें 452 वोटों से जीत हासिल हुई है. इस तरह उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA की जीत हुई है. पूर्व राष्ट्रपति राधाकृष्णन के नाम पर ही सीपी राधाकृष्णन का नाम उनकी मां ने रखा था और इस तरह उनकी वर्षों की एक साध पूरी हुई है. चंद्रपुरम पोनुसामी राधाकृष्णन (पूरा नाम) के पास चार दशकों का राजनीतिक अनुभव है और उन्होंने तमिलनाडु के कोंगु बेल्ट से बीजेपी को कई बार जीत दिलाई है.

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20 अक्टूबर 1957 को तिरुपुर में जन्म
सीपी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तिरुपुर में हुआ था. उनकी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद उनकी मां जानकी अम्मा ने मीडिया बातचीत में कहा था कि "मेरे पहले बेटे का नाम मुरुगन और दूसरे का नाम कृष्णा के नाम पर रखा गया. फिर उनके पिता ने मजाक में कहा कि वह डॉ. राधाकृष्णन, (भारत के दूसरे राष्ट्रपति) की तरह बनेगा. वह हमेशा पढ़ाई में उत्कृष्ट रहा,"  सीपी राधाकृष्णन की मां जानकी अम्मा प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका रही हैं. 

25 वर्षों से राजनीति में सक्रिय परिवार
सीपी राधाकृष्णन के चाचा सीके कुप्पुसामी, भी तीन बार कांग्रेस सांसद रहे हैं. राधाकृष्णन का परिवार पिछले 25 वर्षों से राजनीति में है. सीपीआर 1974 में जनसंघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य चुने गए थे. उन्होंने 1998 में कोयंबटूर से लोकसभा चुनाव जीता, जिसमें डीएमके के एम. रामनाथन को हराया. सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से बीजेपी के उन कुछ उम्मीदवारों में से थे जिन्होंने लोकसभा चुनाव जीता सीपी राधाकृष्णन 2003 से 2006 तक बीजेपी के राज्य अध्यक्ष रहे. 

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70 के दशक में RSS से राजनीति की शुरुआत
सीपी राधाकृष्णन ने 70 के दशक में आरएसएस से स्वयंसेवक के तौर पर सक्रिय राजनीति की राह पकड़ी. इसके बाद वह भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने और संगठनात्मक कामकाज में अहम भूमिका निभाई. लंबे समय तक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने के बाद उन्हें 1994 में तमिलनाडु बीजेपी का सचिव भी नियुक्त किया गया.

शैक्षिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज, कोयम्बटूर से बीबीए (व्यवसाय प्रशासन स्नातक) किया है. राधाकृष्णन अपने कॉलेज में टेबल टेनिस चैंपियन और एक लंबी दूरी के धावक रहे हैं. उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल खेलना भी पसंद है. 

महाराष्ट्र-झारखंड के रहे राज्यपाल
वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे हैं. इससे पहले, उन्होंने 18 फरवरी 2023 से 30 जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया. साथ ही, उन्होंने तेलंगाना और पुदुचेरी में भी अतिरिक्त प्रभार संभाला. 18 फरवरी 2023 को, उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. अपने शुरुआती चार महीनों में, उन्होंने झारखंड के सभी 24 जिलों का दौरा किया और नागरिकों एवं जिला अधिकारियों के साथ बातचीत की. 

कोयंबटूर से दो बार चुने गए सांसद 
राधाकृष्णन 1998 और 1999 में कोयंबटूर लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद चुने गए. सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कपड़ा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) संबंधी संसदीय समिति और वित्त संबंधी परामर्शदात्री समिति के भी सदस्य रह चुके हैं. इसके अलावा वह उस संसदीय विशेष समिति के भी सदस्य रह चुके हैं जिसने स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच की थी.

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संगठन में भूमिका: 2003 से 2006 तक वह तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे. इसके अलावा वो केरल बीजेपी के प्रभारी भी रह चुके हैं. 2004 में राधाकृष्णन ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया. वह ताइवान गए पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे. 2004-2007 के दौरान तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नदियों को जोड़ने, आतंकवाद के विरोध और अस्पृश्यता के उन्मूलन जैसे मुद्दों पर 93 दिनों की रथ यात्रा निकाली थी. उन्होंने संसद में वस्त्र उद्योग पर स्थायी समिति के अध्यक्ष भी रहे और वित्तीय व सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी कई समितियों में योगदान दिया.

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