'हम दलाल देश नहीं हो सकते...', जंग में PAK की मध्यस्थता के सवाल पर बोले जयशंकर

केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है और अतिरिक्त आपूर्ति रास्ते में है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर बुलाई गई यह सर्वदलीय बैठक लगभग डेढ़ घंटा चली. 

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ईरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता के सवाल पर बोले जयशंकर ( File Photo: PTI) ईरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता के सवाल पर बोले जयशंकर ( File Photo: PTI)

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

ईरान जंग को एक महीना पूरा होने जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित होने से तेल एवं गैस संकट बना हुआ है. इस बीच सरकार ने बुधवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई. इस बैठक में जब विदेश मंत्री जयशंकर से ईरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर सवाल किया गया.

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जयशंकर ने मौजूदा जंग खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान की वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता के सवाल पर दो टूक कहा कि हम दलाल देश नहीं हो सकते.

सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान जब विदेश मंत्री जयशंकर से पूछा गया कि पीएम मोदी ने ट्रंप से क्या बातचीत की. तो इस पर जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है.

इससे पहले केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है और अतिरिक्त आपूर्ति रास्ते में है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर बुलाई गई यह सर्वदलीय बैठक लगभग डेढ़ घंटा चली. 

सरकार ने विपक्ष को किया आश्वस्त

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कहा कि देश में पर्याप्त मात्रा में तेल और गैस मौजूद है. देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह पूरी की जा रही हैं. सरकार ने यह भी बताया कि पहले ही एडवांस बुकिंग कर ली गई है. कई देशों के साथ बातचीत भी जारी है. इस तेल और गैस सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए विभिन्न स्रोतों से बातचीत हो रही है.

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एलपीजी की उपलब्धता और होर्मुज के जरिए होने वाली सप्लाई को लेकर विपक्ष की ओर से उठाई गई चिंता पर सरकार ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और अगले चार से पांच दिनों में चार जहाज बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं. सरकार ने यह भी जोर दिया कि किसी तरह की कमी नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं.

सरकार ने यह भी कहा कि वह भूराजनीतिक स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं और किसी दबाव में नहीं है. सरकार ने स्पष्ट किया कि चिंता करने की कोई बात नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं है. इसके साथ ही, सरकार ने कहा कि वह सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है और विपक्ष कभी भी सरकार से संवाद कर सकता है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चर्चा की शुरुआत करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत के लोगों का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है. विदेश सचिव ने  मौजूदा संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों सहित भूराजनीतिक स्थिति का विस्तृत ब्योरा दिया.

विपक्ष ने उठाए सवाल

सूत्रों के अनुसार, सरकार का संदेश यही था कि स्थिति नियंत्रण में है और घरेलू चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. पाकिस्तान को लेकर सरकार ने कहा कि उसकी भूमिका में कुछ नया नहीं है, क्योंकि वह 1981 से इस तरह की भूमिका निभाता रहा है, जिसमें इंटरेस्ट सेक्शंस के माध्यम से भी शामिल है. सूत्रों ने यह भी बताया कि बैठक में महिला आरक्षण विधेयक पर कोई चर्चा नहीं हुई.

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विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले क्यों किए? इसके जवाब में विदेश सचिव ने कथित तौर पर कहा कि ईरान ने परमाणु परीक्षण न करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह उस दिशा में बढ़ता दिख रहा था, जिसके कारण ये हमले हुए.

यह बैठक बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसद भवन में हुई, जिसमें अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी औऱ विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल हुए.

सर्वदलीय बैठक में बीजेडी की ओर से सस्मित पात्रा, जेडीयू से लल्लन सिंह, कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक और तारिक अनवर, समाजवादी पार्टी से धर्मेंद्र यादव और सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटस शामिल हुए.

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