राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT अब अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है. शासन द्वारा तय 15 जुलाई की समयसीमा में अब केवल दो दिन का समय बचा है. ऐसे में जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में अब तक सामने आए तथ्यों के साथ कुछ नए खुलासे भी हो सकते हैं. जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर कुछ और लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की गई है, इसलिए अंतिम रिपोर्ट में नए नामों का खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
साथ ही, एसआईटी केवल चोरी के मामले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के सुझाव भी देगी. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की सिफारिश की जा सकती है.
13 जून को बनी थी SIT, 15 जून से शुरू हुई जांच
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. एसआईटी ने 15 जून से औपचारिक जांच शुरू की और मंदिर परिसर, चढ़ावे की गणना व्यवस्था, रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ का सिलसिला शुरू किया. जांच के शुरुआती चरण में ही एसआईटी ने कई अहम तथ्य जुटाए. एक सप्ताह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई थी. उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि करीब 40 दिनों के भीतर चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी की लगभग 70 घटनाओं के संकेत मिले हैं. इन घटनाओं से जुड़े कई सीसीटीवी फुटेज भी एसआईटी के कब्जे में हैं, जिनका तकनीकी विश्लेषण कराया गया.
जांच का दायरा बढ़ा, इसलिए मांगा गया अतिरिक्त समय
जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आने के बाद एसआईटी ने महसूस किया कि केवल शुरुआती आरोपियों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा. पैसों के लेनदेन, संपत्तियों की खरीद और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ी. इसके बाद एसआईटी ने शासन से समय बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए. अब अंतिम रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट केवल दोष तय करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि राम मंदिर जैसे अत्यंत संवेदनशील धार्मिक स्थल की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए कई ठोस सुझाव भी शामिल किए जाएंगे.
AI आधारित निगरानी पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की सबसे बड़ी सिफारिश मंदिर प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग होगी. रिपोर्ट में सुझाव दिया जा सकता है कि चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को AI आधारित निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाए. इसके तहत चढ़ावा प्राप्त होने से लेकर उसकी गणना, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा होने तक हर चरण की डिजिटल मॉनिटरिंग हो. किसी भी असामान्य गतिविधि या प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी करे. इसके अलावा हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, फेस रिकग्निशन तकनीक, डिजिटल ऑडिट ट्रेल, मल्टी-लेयर एक्सेस कंट्रोल, नियमित ऑडिट और चढ़ावे की गिनती के दौरान स्वतंत्र निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिए जाने की संभावना है.
मंदिर संचालन को और व्यवस्थित बनाने पर भी रहेगा फोकस
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी यह भी मानती है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर में केवल सुरक्षा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा. इसी वजह से रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना के लिए मानकीकृत प्रक्रिया, कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने, समय-समय पर रोटेशन प्रणाली लागू करने, रिकॉर्ड के डिजिटल संरक्षण और नियमित स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था जैसे सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं.
नृपेन्द्र मिश्रा बोले: राम मंदिर में चोरी होना अपने आप में कलंक
इस बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने भी इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताया है. अयोध्या पहुंचे नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर में चोरी होना अपने आप में एक कलंक है और इस घटना ने सभी को आहत किया है. उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद हर कोई खुद को छोटा महसूस कर रहा है. कहीं न कहीं व्यवस्था में कमी रही है, जिसे दूर किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो. नृपेन्द्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि उनका कार्यक्षेत्र मंदिर निर्माण से जुड़ा है और वह निर्माण समिति की बैठक में भाग लेने आए हैं. इस बैठक में एलएंडटी, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड जैसी एजेंसियों के साथ निर्माण कार्यों की समीक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अलग समिति कर रही है और वह उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है.
जांच समिति ट्रस्ट को सौंपेगी रिपोर्ट
सीईओ और जांच प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं. समिति अपनी रिपोर्ट सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी और आगे की कार्रवाई ट्रस्ट तय करेगा. मोबाइल फोन प्रतिबंध से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में मोबाइल पर किसी प्रकार का प्रतिबंध उन्होंने लागू नहीं किया है और यह विषय भी उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा कि भगवान रामलला का भव्य मंदिर विश्वभर के सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है. वर्षों के संघर्ष और लंबे आंदोलन के बाद भगवान रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं. यही वजह है कि श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसमें किसी कमी की संभावना नहीं है. लगभग हर सनातन श्रद्धालु जीवन में कम से कम एक बार अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करना चाहता है.
आरोपी की निशानदेही पर डिजायर कार बरामद
उधर, पुलिस जांच में भी लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं. पुलिस ने रिमांड पर लिए गए आरोपी अनुकल्प मिश्रा की निशानदेही पर एक स्विफ्ट डिजायर कार बरामद की है. यह कार फिलहाल रामजन्मभूमि थाने में खड़ी कराई गई है. पुलिस के अनुसार यह कार 16 मई 2025 को गोरखपुर से खरीदी गई थी और 22 मई को अयोध्या आरटीओ में इसका पंजीकरण कराया गया था. वाहन का रजिस्ट्रेशन आरोपी के पिता रविंद्र कुमार के नाम पर दर्ज है. कार का नंबर UP 42 BZ 5222 बताया गया है. सूत्रों का दावा है कि यह कार कथित तौर पर चोरी के पैसों से खरीदी गई थी.
सोने की चेन और पेंडेंट भी बरामद
पुलिस तीनों आरोपियों को तड़के उनके पैतृक आवास लेकर पहुंची थी, जहां छापेमारी के दौरान कई सामान बरामद किए गए. सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा की निशानदेही पर स्विफ्ट डिजायर कार के अलावा सोने की चेन और सोने का पेंडेंट भी बरामद हुआ है. इन बरामदगी को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है. जांच एजेंसियां अब केवल नकदी और संपत्तियों तक सीमित नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने ऐसे कुछ लोगों की भी पहचान की है, जो नकद पैसा लेकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करते थे. इन सभी संदिग्ध खातों की जांच की जा रही है. बैंक ट्रांजैक्शन, खातों में जमा रकम और पैसों के स्रोत की पड़ताल जारी है. यदि जांच में वित्तीय लेनदेन से जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं तो कुछ और लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है.
रिमांड के दौरान जुटाए गए कई अहम साक्ष्य
पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को 40 घंटे की रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की थी. पूछताछ और निशानदेही के आधार पर लगातार नए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं. इससे पहले आरोपी अविनाश शुक्ला के कब्जे से एक ब्रेजा कार भी बरामद की जा चुकी है. अब पुलिस कथित रूप से चोरी की रकम से खरीदी गई अन्य संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है.
अब निगाहें 15 जुलाई पर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब सबकी नजरें 15 जुलाई पर टिकी हैं. उसी दिन एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी. माना जा रहा है कि रिपोर्ट में जांच के निष्कर्षों के साथ-साथ कुछ नए नामों, तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन में व्यापक सुधार के सुझाव शामिल हो सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो यह रिपोर्ट न केवल इस चर्चित मामले की दिशा तय करेगी, बल्कि भविष्य में देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा और पारदर्शिता का नया मॉडल भी पेश कर सकती है.
समर्थ श्रीवास्तव