पीतल का कछुआ, कांजीवरम सिल्क और बीदर कला... पीएम मोदी ने सेशेल्स में क्या-क्या तोहफे दिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स के तीन दिवसीय दौरे के दौरान न केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को भी प्रमुखता से सामने रखा है.

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प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के दौरे पर भारतीय शिल्प को उपहार में दिया प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के दौरे पर भारतीय शिल्प को उपहार में दिया

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:01 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के दौरान केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों को ही मजबूत नहीं किया, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को भी दुनिया के सामने पेश किया. उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रथम महिला, द्वितीय महिला और संसद अध्यक्ष को भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए. इन उपहारों के जरिए भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान, हस्तकरघा परंपरा और शिल्पकला की झलक देखने को मिली.

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पीतल का कछुआ और सेशेल्स की साझा संस्कृति

प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तैयार किया गया पीतल का कछुआ भेंट किया. मुरादाबाद को 'ब्रास सिटी' के नाम से जाना जाता है और यहां के कारीगर धातु शिल्प के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. भारतीय परंपरा में कछुआ बुद्धिमत्ता, स्थिरता, धैर्य और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है. यह उपहार इसलिए भी खास रहा क्योंकि सेशेल्स अपनी विशाल एल्डाब्रा जाइंट टॉरटॉइज प्रजाति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. ऐसे में यह उपहार दोनों देशों की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को जोड़ने वाला प्रतीक बन गया.

महेश्वरी सिल्क और बीदरी कला का बना बॉक्स

राष्ट्रपति की पत्नी और प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को प्रधानमंत्री मोदी ने दो विशेष उपहार दिए. पहला मध्य प्रदेश के महेश्वर की प्रसिद्ध महेश्वरी सिल्क स्टोल, जिसे रेशम और सूती धागों से तैयार किया जाता है. इस स्टोल पर पारंपरिक ज्यामितीय और पुष्प आकृतियां बनी होती हैं, जो भारतीय हथकरघा कला की खूबसूरती को दर्शाती हैं. दूसरा उपहार कर्नाटक के बीदर की प्रसिद्ध बिदरी कला से बना बॉक्स था. जिंक और तांबे के मिश्रधातु पर चांदी की महीन जड़ाई वाली यह कला भारत की सबसे अनूठी धातु शिल्प परंपराओं में गिनी जाती है.

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सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले को सिक्किम की ऑर्किड आर्ट पेंटिंग भेंट की गई. इस पेंटिंग में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को सिक्किम के खूबसूरत ऑर्किड फूलों और लताओं के बीच दर्शाया गया है. इस उपहार का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि ऑर्किड सेशेल्स का राष्ट्रीय पुष्प है, जबकि मोर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है. यह पेंटिंग जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है.

उपराष्ट्रपति की पत्नी लीना पिल्लई को तमिलनाडु के कांचीपुरम की प्रसिद्ध कांजीवरम सिल्क फैब्रिक भेंट की गई. अपनी शानदार गुणवत्ता, मजबूती और सुनहरी जरी के काम के लिए मशहूर यह रेशमी वस्त्र भारत की सबसे प्रतिष्ठित हथकरघा परंपराओं में शामिल है. लाल, हरे और सुनहरे बॉर्डर तथा पारंपरिक मंदिर वास्तुकला और प्रकृति से प्रेरित डिजाइन वाली यह साड़ी भौगोलिक संकेतक (GI) टैग और 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना के तहत भी मान्यता प्राप्त है.

पारंपरिक टोडा कढ़ाई वाली शॉल

सेशेल्स की नेशनल असेंबली के स्पीकर अजारेल एर्नेस्टा को तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले टोडा जनजाति द्वारा हाथ से तैयार की जाने वाली पारंपरिक टोडा कढ़ाई वाली शॉल भेंट की गई. सफेद सूती कपड़े पर लाल और काले धागों से बनी ज्यामितीय कढ़ाई इस शॉल की खास पहचान है. इसे पारंपरिक 'पुखूर' तकनीक से तैयार किया जाता है और धार्मिक व सांस्कृतिक अवसरों पर पहना जाता है. यह उपहार भारत की आदिवासी कला और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रतीक भी है.

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस दौरे के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने वाले 19 महत्वपूर्ण समझौतों और परिणामों को अंतिम रूप दिया. इस दौरान सेशेल्स के राष्ट्रपति ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' से भी सम्मानित किया. इस तरह यह दौरा केवल कूटनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक शिल्पकला और 'सॉफ्ट पावर' को भी वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर बना.
 

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