राज्यसभा में बुधवार को एलपीजी और गैस की किल्लत के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों की तीखी तकरार देखने को मिली. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर शॉर्ट ड्यूरेशन च4चा की डिमांड की और कहा कि हम जो सुझाव देते हैं, वह सहमत नहीं होते. विपक्ष के नेता ने सरकार को घेरते हुए कहा कि ये जब चाहे, बिल लाते हैं. जब चाहे, चर्चा के लिए तैयार होते हैं. जब चाहे, तब स्टेटमेंट देते हैं. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार की बात विपक्षी दल ही नहीं सुनते.
दरअसल, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मैंने एक बार नहीं, दो बार नियम 176 के तहत संक्षिप्त चर्चा के लिए लेटर दिया. उसके लिए उनके पास समय नहीं है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया तबाह हो रही है, एलपीजी और गैस के लिए. इधर दाम बढ़ रहे हैं. खड़गे ने कहा कि कीमतें बढ़ रही हैं और आप चर्चा नहीं चाहते. हम जो सुझाव देते हैं, वह सहमत नहीं होते. खड़गे ने कहा कि वे (सत्तापक्ष) जो चाहते हैं, उसे जबरदस्ती रखते हैं और ध्वनिमत करा लेते हैं. क्या ये लोकतंत्र है.
उन्होंने चेयरमैन को संबोधित करते हुए कहा कि आपके आने के बाद मैंने सोचा कि विपक्ष को न्याय मिलेगा. इस पर चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मैंने आपको ज्यादा समय दिया है. इसके बाद ट्रेजरी बेंच को. ये डेटा है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि समय महत्वपूर्ण नहीं है सर. महत्वपूर्ण ये है कि हमने जो मुद्दा उठाया, उसके लिए कितना समय दिया गया.
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मल्लिकार्जुन खड़गे की बात का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में भी कई सदस्यों ने ये मैटर रखा था. हम लोगों ने बताया था कि सरकार चर्चा से नहीं भाग रही है. उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता जो कह रहे हैं, वह सही नहीं है. सबसे पहले लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में संबंधित मंत्रियों का स्टेटमेंट हुआ. फिर प्रधानमंत्री ने भी दोनों सदनों में विस्तार से जानकारी दी. रिजिजू जब बोल रहे थे, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा कर दिया.
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विपक्षी सदस्यों की आपत्ति और हंगामे पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि अगर मुझे जवाब नहीं देना है, तो मेरे बदले किसको बोलना चाहिए. ये आप बताइए. अगर मेरा ही नहीं सुनोगे, तो कौन जवाब देगा. बताइए. उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता को बोलने दिया जाता है. रिजिजू ने कहा कि यहां एक परेशानी है. जो बोलना चाहते हैं, वही बोलते हैं. ये सुनना नहीं चाहते हैं. ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं और खुद ही नहीं सुनना चाहते सरकार की बात.
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उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट को लेकर जब सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, तब लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही विपक्ष के नेता इसमें शामिल नहीं हुए. कांग्रेस से प्रतिनिधि आए और दूसरे दलों के नेता भी पहुंचे. रिजिजू ने कहा कि जब फाइनेंस बिल पर चर्चा हुई, आपका ही पूरा रिकॉर्ड आपको भेज देता हूं. एलपीजी, पेट्रोल-डीजल क्राइसिस, इसी पर आपने अपनी पूरी बात रखी है. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने विस्तार से जवाब दिया है. प्रधानमत्री ने भी सभी मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मीटिंग की है.
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किरेन रिजिजू ने कहा कि वित्त मंत्री ने दोनों सदनों में विस्तार से यह बताया कि सरकार ने इस संकट का समाधान निकालने के लिए कितने कदम उठाए हैं. कीमतें कम रहें, आम आदमी की पहुंच से बाहर न जाएं, इसके लिए एक्साइज ड्यूटी में ऐतिहासिक कटौती की गई. उन्होंने कहा कि इतने बड़े संकट को इतने अच्छे से हैंडल करने के बाद, इतना बड़ा कदम उठाने के बाद भी आप राजनीति करते हैं. ये कोई राजनीति करने का चीज है क्या.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने रिजिजू के बयान का खंडन करते हुए कहा कि हमने बैठक में अपना प्रतिनिधि भेजा था. उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री उस बैठक में क्यों नहीं थे. प्रधानमंत्री कहां थे. किरेन रिजिजू ने इस पर तल्ख प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष के सदस्य एक ही काम करते हैं- प्रधानमंत्री को गाली देना.
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