सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स रेगुलेशन बिल, 2026 राज्यसभा से पारित हो गया है. राज्यसभा में बुधवार को गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने इस बिल पर हुई चर्चा का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि यह बिल सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में अस्पष्टताओं और प्रबंधन से जुड़ी हुई चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. इससे इन बलों की कार्यकुशलता और मनोबल, दोनों को सुद्ढ़ किया जा सकेगा.
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि सीएपीएफ का दायरा निरंतर विस्तृत होता गया है. इनके संचालन में कई असुविधाएं भी दिखाई पड़ीं. समय-समय पर संचालन के लिए अलग-अलग नियम और निर्देश होते चले गए. उन्होंने कहा कि ये बल प्लाटून, कमांड पर आधारित हैं. सीएपीएफ में प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्ति की व्यवस्था विकसित हुई है. इनके लिए एक स्पष्ट ढांचा उपलब्ध कराया जाए, इसीलिए यह बिल लाया गया है. नित्यानंद राय ने कहा कि भर्ती और सेवा शर्तों में स्पष्टता के लिए इस बिल में प्रावधान किया गया है. कैडर प्रबंधन को संगठनात्मक आवश्यकता के अनुरूप बढ़ा जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के नियम वित्तीय लाभ की निरंतरता को सुनिश्चित करते हैं. यह बिल संघीय ढांचे को और मजबूत करता है. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा में एक समन्वित दृष्टिकोण मिलता है. नित्यानंद राय ने कहा कि ग्रुप ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों के संबंध में बताना चाहता हूं कि अधिकारियों को चार पदोन्नति मिलती है. जहां भी कहीं पदोन्नति लंबित रहती है, तब होता है जब न्यायालय में मामले लंबित होते हैं. उन्होंने कहा कि विभागीय कार्रवाई की वजह से भी यह प्रभावित होता है.
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नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक तेज, समयबद्ध बनाने के लिए बहुत प्रयास किए हैं. प्रक्रिया अब सुगम हुई है और समय घटा है. उन्होंने कहा कि बलों के बुनियादी ढांचे, आवास बढ़े हैं. प्रशिक्षण सुधार हुए हैं. आज हमारी सीएपीएफ अधिक मजबूत हुई है. इसका परिणाम भी आया है. कर्मियों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं.
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नित्यानंद राय ने कहा कि पहले कांग्रेस सरकार ने उनके हाथ-पांव बांध रखा था. सीने पर गोली खा लेते थे, लेकिन गोली चलाने का अधिकार नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनको सख्त से सख्त कार्रवाई करने का अधिकार दिया है.
वोटिंग से पहले विपक्ष का वॉकआउट
मंत्री के बयान के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्लैरिफिकेशन की मांग की. इस पर चेयर से हरिवंश ने उनको टोकते हुए कहा कि बिल पर बहस हो चुकी है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आप बोलने देना नहीं चाहते, वो सुनना नहीं चाहते. इस पर उपसभापति ने कहा कि नियम के तहत ही कह रहा हूं. ब्रीफली बताएं. विपक्ष के नेता ने कहा कि डेप्यूटेशन, इंस्टीट्यूशनलाइजेशन, करियर प्रोग्रेशन और मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव, कंसल्टेशन और रिप्रेजेंटेशन का इसमें अभाव है.
जेपी नड्डा ने विपक्ष को घेरा
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि स्प्रिट ऑफ ज्यूडिशियल डायरेक्शन, इन पॉइंट्स का उत्तर भी इसमें नहीं है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बिल को सलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की. इसके बाद विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए. विपक्ष के नेता की आपत्तियों पर नेता सदन जेपी नड्डा ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता तजुर्बेकार हैं. मंत्री के जवाब के बाद वक्तव्य देना संसदीय नियमों के खिलाफ है. वह क्लैरिफिकेशन मांग सकते हैं. मंत्री ने जब जवाब दिया, तब वे वॉकआउट कर रहे हैं.
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