श्री श्री रविशंकर की संस्था पर जमीन कब्जाने का आरोप, कर्नाटक सरकार ने जांच के लिए SIT गठित की

कर्नाटक सरकार ने श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग पर सरकारी जमीन के कथित अतिक्रमण के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित की है. सरकार का दावा है कि संस्था के परिसर में सरकारी, गोमाला और SC/ST भूमि पर कब्जे की शिकायतें मिली हैं. एसआईटी जमीन के रिकॉर्ड, लीज दस्तावेज, कथित फर्जीवाड़े, पर्यावरणीय नुकसान और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की भी जांच करेगी और तीन महीने में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी.

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कर्नाटक सरकार ने श्री श्री रविशंकर की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' पर जमीन पर कब्जे के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित की. (File Photo: PTI) कर्नाटक सरकार ने श्री श्री रविशंकर की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' पर जमीन पर कब्जे के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित की. (File Photo: PTI)

सगाय राज

  • बेंगलुरु,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:38 PM IST

कर्नाटक सरकार ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' (Art of Living) द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के आरोपों की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है. उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि संस्था के परिसर में बड़े पैमाने पर सरकारी और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) की जमीन पर कब्जे की शिकायतें मिली हैं, जिनकी विस्तृत जांच जरूरी है.

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परमेश्वर ने कहा कि शिकायतों के अनुसार, करीब 250 एकड़ में फैले आर्ट ऑफ लिविंग कैंपस में लगभग 150 एकड़ SC/ST भूमि शामिल होने का आरोप है. उन्होंने बताया कि जांच की जिम्मेदारी बेंगलुरु डिवीजन के क्षेत्रीय आयुक्त अम्मन आदित्य बिस्वास के नेतृत्व वाली SIT को सौंपी गई है. 17 जुलाई को राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, एसआईटी को कग्गलीपुरा, बीएम कावल और अगारा गांवों में सरकारी जमीन, गोमाला (चरागाह) भूमि, तालाबों और राजकालुवे (बरसाती नालों) पर कथित अतिक्रमण की जांच करनी होगी. समिति को तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.

क्या-क्या जांच करेगी SIT?

सरकार के आदेश के अनुसार SIT निम्न बिंदुओं की जांच करेगी:

  1. सरकारी और संस्थागत भूमि अभिलेखों की जांच.
  2. जमीन आवंटन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन.
  3. मूल लाभार्थियों और उनके कानूनी वारिसों की पहचान.
  4. फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों की जांच.
  5. लंबित अदालती मामलों की समीक्षा.
  6. सैटेलाइट इमेजरी के जरिए पर्यावरणीय नुकसान का आकलन.
  7. सार्वजनिक जमीन, तालाबों और जल निकासी मार्गों का सर्वे.
  8. संबंधित पक्षों को समन जारी कर उनका पक्ष सुनना.
  9. कथित अतिक्रमण की सत्यता तय करना और कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करना.
  10. 2025 की सर्वे रिपोर्ट में सामने आए थे आरोप.

सरकारी आदेश में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में सहायक भूमि अभिलेख निदेशक द्वारा किए गए सर्वे में प्रथम दृष्टया पाया गया था कि 'आर्ट ऑफ लिविंग' के ट्रस्टियों और कुछ अन्य लोगों ने सरकारी गोमाला भूमि के 290 एकड़ से अधिक क्षेत्र पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा किया है. आरोप है कि इसके लिए सरकारी लीज, संदिग्ध भूमि आवंटन दस्तावेजों और अन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया. सर्वे में यह भी कहा गया कि कब्जे वाली जमीन का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया जा रहा था, जिसके लिए उसे मूल रूप से आवंटित किया गया था.

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हाई कोर्ट के निर्देशों का भी होगा अध्ययन

सरकार ने अपने आदेश में उस जनहित याचिका (PIL) का भी उल्लेख किया है, जिसमें श्री श्री रविशंकर, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर के पदाधिकारी और सुमेरु ग्लोबल सपोर्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड समेत कई पक्षकारों पर सरकारी जमीन, तालाबों और राजकालुवे पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है. आदेश के मुताबिक, 9 सितंबर 2025 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन को कानून के मुताबिक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था. 

लीज खत्म होने के बाद कब्जे का आरोप

सरकारी आदेश में कहा गया है कि सर्वे नंबर-46 की 41 एकड़ सरकारी गोमाला भूमि वर्ष 1985 में 40 साल के लिए लीज पर दी गई थी. सरकार का आरोप है कि यह लीज 2015 में समाप्त हो गई, लेकिन उसके बाद भी जमीन पर कब्जा जारी रहा. इसके अलावा बीएम कावल के सर्वे नंबर-135 की 19 एकड़ जमीन भी लीज पर दी गई थी. सरकार का आरोप है कि संस्था ने कथित तौर पर अपनी चारदीवारी का विस्तार कर आसपास के तालाब, नाले, चट्टानी सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों तक को अपने परिसर में शामिल कर लिया. सरकार के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा 291 एकड़ 38 गुंटा जमीन को घेरने का उल्लेख किया गया है, जिसमें 60 एकड़ सरकारी लीज वाली जमीन भी शामिल है. रिपोर्ट में लीज की शर्तों और विभिन्न कानूनों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं. 

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आर्ट ऑफ लिविंग ने जांच का स्वागत किया

इस मुद्दे पर श्री श्री रविशंकर की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा, 'हम एसआईटी गठन का स्वागत करते हैं. हमें विश्वास है कि निष्पक्ष और व्यापक जांच से सभी तथ्य सामने आएंगे और इस मामले का अंतिम रूप से समाधान हो जाएगा. जहां तक हमारे खिलाफ लगाए गए आरोपों का सवाल है, किसी भी तरह के अतिक्रमण का प्रश्न ही नहीं उठता. हम सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं. वास्तव में, चार से पांच महीने पहले सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में यह स्थापित हो चुका है कि सरकार ने हमें जो 60 एकड़ जमीन आवंटित की थी, उसमें से हमारे कब्जे में केवल 36 एकड़ ही है. सरकार ने अब तक शेष 24 एकड़ जमीन हमें सौंपे जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की है.'

'आर्ट ऑफ लिविंग' के प्रवक्ता ने आगे कहा, 'ये पूरी कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रेरित है. इसे एक विधान परिषद (MLC) सदस्य द्वारा हमें डराने-धमकाने और परेशान करने की सोची-समझी कोशिश के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है. संबंधित एमएलसी खुद एक आपराधिक मामले में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं. हमारे पास कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से उगाही (एक्सटॉर्शन) की कोशिश किए जाने से जुड़े फोन कॉल की रिकॉर्डिंग मौजूद हैं, जो हमारे आरोपों की पुष्टि करती हैं. ये लोग स्थानीय निवासी नहीं हैं, बल्कि बाहर से आए हैं और उनका उद्देश्य कथित तौर पर हमसे धन उगाही करना है. हमने इस मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज संबंधित अधिकारियों को सौंप दिए हैं. हमें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और पूरा विश्वास है कि अंततः सच की ही जीत होगी.'
 

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