कर्नाटक में दिवाली पर सिर्फ दो घंटे पटाखे फोड़ पाएंगे लोग, बीजेपी ने फैसले पर उठाए सवाल

कर्नाटक में दिवाली के मौके पर कांग्रेस सरकार ने लोगों को सिर्फ दो घंटे पटाखा फोड़ने की इजाजत दी है. इस फैसले पर विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि राज्य सरकार ऐसे प्रतिबंध सिर्फ हिंदू त्योहारों पर ही लगाती है. वहीं कांग्रेस सरकार ने इस फैसले को केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बताया है.

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यह सांकेतिक तस्वीर है यह सांकेतिक तस्वीर है

सगाय राज

  • बेंगलुरु,
  • 26 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 9:52 PM IST

कर्नाटक में दिवाली के मौके पर राज्य सरकार ने सिर्फ दो घंटे के लिए पटाखे फोड़ने की अनुमति दी है जिसको लेकर वहां राजनीति शुरू हो गई है. कांग्रेस सरकार द्वारा पटाखे फोड़ने को लेकर जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों की बीजेपी नेताओं ने आलोचना की है.

बीजेपी ने फैसले पर उठाए सवाल

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि पटाखे केवल रात 8 से 10 बजे के बीच ही फोड़े जाएं और इस दौरान केवल ग्रीन पटाखों का ही उपयोग किया जाए. इस पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये प्रतिबंध केवल हिंदू त्योहारों जैसे गणेश चतुर्थी और दीपावली पर ही लागू किए जाते हैं.

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सरकार ने केंद्र के दिशा-निर्देश का दिया हवाला

वहीं सरकार के फैसले को लेकर वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने हमारे सहयोगी चैनल इंडिया टुडे से कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के आदेशों का पालन है, जिसमें पटाखे फोड़ने के लिए केवल दो घंटे का समय दिया गया है. इस दौरान ग्रीन पटाखों को जलाने की ही अनुमति है, जिनका साउंड डेसिबल स्तर 125 से कम होना चाहिए.

मंत्री खंड्रे ने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार अपने आदेश में बदलाव करती है और पटाखे फोड़ने के लिए अधिक समय की अनुमति देती है, तो वे इन प्रतिबंधों को हटाने पर विचार करेंगे. ईश्वर खंड्रे ने भाजपा नेता यतनाल पर निशाना साधते हुए कहा, 'यतनाल मुझसे व्यक्तिगत नाराजगी रखते हैं क्योंकि मैंने उनकी कंपनी के लिए प्रदूषण मंजूरी नहीं दी, इसी वजह से उन्होंने मुझे निशाना बनाया है और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी पोस्ट की है.'

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कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं को घेरा

उन्होंने आगे कहा, 'मंत्री प्रह्लाद जोशी को अपने ही सरकार के आदेशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बारे में जानकारी नहीं है. अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट और अपनी ही सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना चाहिए.' वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने केवल केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया है.

 

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