पीली-लाल पोटली में क्या है... जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार से सामने आए ये सीक्रेट

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की 48 साल बाद गिनती बुधवार को शुभ मुहूर्त में शुरू हुई. इस प्रक्रिया में RBI अधिकारियों की निगरानी में सोने, चांदी और अन्य धातुओं के आभूषणों की इन्वेंट्री तैयार की जा रही है.

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जगन्नाथ मंदिर में 48 वर्ष बाद रत्न भंडार की इन्वेंट्री लिस्ट बन रही है जगन्नाथ मंदिर में 48 वर्ष बाद रत्न भंडार की इन्वेंट्री लिस्ट बन रही है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:05 PM IST

ओडिशा के पुरी में मौजूद भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में क्या-क्या है, इसे लेकर 48 साल बाद गिनती शुरू हुई है. बुधवार को शुभ मुहूर्त के अनुसार इस प्रोसेस की शुरुआत हुई, जिसके बाद मंदिर के श्रीरत्न क्षेत्र में मौजूद रत्न भंडार का रहस्य सामने आने वाला है. रत्न भंडार में क्या-क्या और कितना है इसकी लिस्टिंग (इन्वेंट्री) तैयार करने का काम RBI अफसरों की निगरानी में शुरू हो चुका है.

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जगन्नाथ मंदिर सनातन परंपरा के चार धामों में से एक है. वैष्णव संप्रदाय का सदियों पुराना ये मंदिर हमेशा ही अपनी अनोखी परंपराओं की वजह से चर्चा में रहा है. इसके साथ ही मंदिर के साथ जुड़ी तमाम कहानियां और इसके रहस्य भी लोगों के बीच दिलचस्पी जगाते हैं.

बुधवार को जब इंन्वेंट्री बननी शुरू हुई तो ऐसी ही एक और बात सामने आई. पीली, लाल और सफेद कपड़ों की पोटली में क्या है, इसकी भी जानकारी सामने आई है. SOP के मुताबिक पीली पोटली में सोने की वस्तुएं और आभूषण रखे जा रहे हैं. सफेद मलमली पोटली में चांदी के गहने और और लाल मखमली पोटली में अन्य धातुओं की वस्तुएं रहेंगी.

सामने आया है कि शुभ मुहूर्त दोपहर 12.09 बजे से 1.40 बजे के बीच का था. इस दौरान मंदिर की परंपराओं का पालन करते हुए आभूषणों की गिनती शुरू हुई. 

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साल 1978 में हुई गिनती
इससे पहले ये गिनती साल 1978 में हुई थी. इसके 48 साल बाद अब दोबारा ये गिनती हो रही है. आखिरी बार यह सूची 13 मई से 23 जुलाई 1978 के बीच तैयार की गई थी. उस समय 128.38 किलोग्राम वजनी 454 सोने-मिश्रित वस्तुएं और 221.53 किलोग्राम वजनी 293 चांदी-मिश्रित वस्तुएं, साथ ही कई कीमती रत्न दर्ज किए गए थे. जहां 1978 की प्रक्रिया को पूरा होने में 72 दिन लगे थे, वहीं अधिकारियों का कहना है कि इस बार आधुनिक तकनीक की मदद से इसे कम समय में पूरा कर लिया जाएगा.

दैनिक पूजा-पाठ पर नहीं पड़ेगा असर
इस पूरी प्रोसेस के दौरान 12वीं सदी के इस मंदिर में दैनिक पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं होगा. श्रद्धालुओं को ‘बाहरा कथा’ (मंदिर के अंदर बाहरी बैरिकेड) से दर्शन की अनुमति दी गई है, जबकि ‘भीतरा कथा’ क्षेत्र में इस दौरान एंट्री बैन रहेगी. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति द्वारा तैयार SOP के अनुसार ही जांच और गिनती होगी. इस SOP को राज्य सरकार की मंजूरी मिली है. इसके अनुसार इन्वेंट्री की शुरुआत रोजाना पूजा में उपयोग होने वाले आभूषणों से होगी. इसके बाद रत्न भंडार के बाहरी कक्ष और अंत में आंतरिक कक्ष को खोला जाएगा.

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कौन-कौन हैं गिनती में?
इन्वेंट्री के दौरान दो जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ) वस्तुओं की पहचान में सहयोग कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटोग्राफी की जा रही है. सोने के आभूषणों को पीले कपड़े, चांदी के आभूषणों को सफेद कपड़े और अन्य वस्तुओं को लाल कपड़े में लपेटकर छह विशेष रूप से तैयार संदूकों में रखा जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में मंदिर के सेवायत, सरकारी बैंकों के अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.

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