IndiGo संकट, बढ़ती डिमांड, एयरपोर्ट्स पर हाहाकार... समझें- सरकार ने कैसे तय किए 7500 से 18000 रु तक हवाई टिकट के दाम

पिछले कुछ दिनों में ही इंडिगो की हजारों फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं. वहीं जो फ्लाइट्स चल रही हैं, उनमें भी घंटों की देरी हो रही है. इसके चलते अन्य एयरलाइंस के टिकटों के दाम आसामान छूने लगे. शनिवार को दिल्ली से मुंबई के टिकट 28,000 रुपये से अधिक में बिक रहे थे, जो आम रेट से कहीं ज्यादा था.

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केंद्र सरकार ने घरेलू एयरफेयर पर 7,500 से 18,000 रुपये तक की सीमा तय कर दी है. (Photo: PTI) केंद्र सरकार ने घरेलू एयरफेयर पर 7,500 से 18,000 रुपये तक की सीमा तय कर दी है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 6:38 AM IST

देश में घरेलू उड़ानों में पिछले कुछ दिनों से जारी व्यापक संकट के बीच केंद्र सरकार ने इमरजेंसी कदम उठाते हुए घरेलू एयरफेयर पर 7,500 से 18,000 रुपये तक की सीमा तय कर दी है. यह फैसला इंडिगो द्वारा हजारों फ्लाइट रद्द करने के बाद आया, जिसके चलते फ्लाइट्स के टिकट की कीमतें सामान्य से कहीं अधिक बढ़ा दी गईं. 

500 किमी तक की दूरी वाले रूट पर एकतरफा किराया 7,500 रुपये से अधिक नहीं होगा. वहीं दिल्ली से मुंबई जैसे 1,000-1,500 किमी के रूट्स पर अधिकतम किराया 15,000 रुपये तय किया गया है. 1500 किमी से लंबी उड़ानों के लिए अधिकतम किराया 18,000 रुपये तय किया गया है. 

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यह नियम इकोनॉमी क्लास के सभी टिकटों पर लागू होगा. हालांकि एयरपोर्ट शुल्क और टैक्स इसमें शामिल नहीं हैं. मंत्रालय ने कहा कि किराया नियंत्रण की ऐसी स्थिति पिछली बार कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई थी और 2022 में जब मांग स्थिर हुई थी, इसे हटा दिया गया था.

क्यों जरूरी था यह कदम

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह कदम इसलिए जरूरी था क्योंकि इंडिगो के लगातार फ्लाइट कैंसलेशन से दिसंबर में पीक सीजन से ठीक पहले सप्लाई में भारी कमी आ गई थी. भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन, जिसका मार्केट शेयर 60% से ज़्यादा है, के रोजाना सैकड़ों उड़ानें रद्द करने से दूसरी एयरलाइंस के किराए में तेजी से बढ़ोतरी हुई. शनिवार को दिल्ली से मुंबई के टिकट 28,000 रुपये से अधिक में बिक रहे थे, जो आम रेट से कहीं ज्यादा था. बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे एयरपोर्ट पर फंसे हुए यात्रियों की भीड़ देखी गई क्योंकि कैंसलेशन बढ़ते जा रहे थे.

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डायनामिक प्राइसिंग का इस्तेमाल करती हैं एयरलाइंस

बता दें कि सामान्य परिस्थितियों में भारत में घरेलू किराया प्रणाली डिरेग्युलेटेड है. एयरलाइंस डायनामिक प्राइसिंग का इस्तेमाल करती हैं, यानी जैसे-जैसे सस्ते टिकट बिकते हैं, किराया बढ़ता है. लेकिन हाल के संकट और किराए में भारी उछाल को देखते हुए MoCA ने हस्तक्षेप किया.

विश्लेषकों का कहना है कि सरकार ने महंगाई, संचालन लागत और अचानक डिमांड-सप्लाई असंतुलन को ध्यान में रखते हुए इस सीमा को तय किया है. हालांकि सरकार ने कोई तय फॉर्मूला नहीं बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये सीमाएं मोटे तौर पर मौजूदा लागत संरचनाओं के अनुरूप हैं. एक एनालिस्ट ने कहा, "अगर हम देखें कि एयरलाइंस इस हफ्ते कितना अधिक पैसा वसूल रहे थे, 1500 कीमी से ज्यादा के रूट्स पर 18,000 रुपये की लिमिट लगाना सही है. महंगाई और फ्यूल की कीमतों के कारण पिछले कुछ सालों में बेस फेयर बढ़ गए हैं."

अब तक कई यात्री चुका चुके मोटा किराया

हालांकि, एनालिस्ट्स ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह कदम कई यात्रियों के लिए बहुत देर से उठाया गया. पिछले कुछ दिनों में जो लोग फंसे हुए थे या जिन्हें दोबारा बुकिंग करनी पड़ी, उन्हें अक्सर नई लिमिट से दोगुना ज़्यादा पैसे देने पड़े. एक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने कहा, "यह दखल आगे यात्रा करने वालों को तो राहत देता है लेकिन पिछले कई दिनों से लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन के चलते पहले ही बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान हो चुका है."

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इंडिगो की स्थिति और पायलट नियम

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में ही इंडिगो की हजारों फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं. वहीं जो फ्लाइट्स चल रही हैं, उनमें भी घंटों की देरी हो रही है. देशभर के एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को 20-20 घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है. हवाई यात्रियों को हो रही इस परेशानी की वजह DGCA द्वारा बनाए गए कुछ नए नियम हैं. Indigo ने इन नियमों को बिना किसी तैयारी और सही योजना बनाए लागू कर दिया, जिससे अव्यवस्था फैल गई. हालांकि अब इन नियमों में ढील दे दी गई है लेकिन इसके बाद भी इंडिगो ने बयान जारी कर कहा है कि फ्लाइट्स ऑपरेशन को पूरी तरह से नॉर्मल होने में 10 से 15 दिसंबर तक का समय लग सकता है. 

DGCA के कौन से नियम लागू करने में हुई लापरवाही

DGCA के नए नियम ये थे कि 7 दिन लगातार काम करने के बाद फ्लाइट स्टाफ को 2 दिन की छुट्टी दी जाए. नाइट लैंडिंग की अधिकतम सीमा 6 से कम करके 2 कर दी गई. नाइट लैंडिंग से मतलब ये है कि रात की शिफ्ट में फ्लाइट स्टाफ को अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर कितनी बार लैंड करवाया गया. इसके अलावा फ्लाइट स्टाफ की नाइट शिफ्ट को लगातार 2 रातों से ज्यादा ना करने के लिए कहा गया. लंबी उड़ानों के बाद पायलट को कम से कम 24 घंटे का आराम अनिवार्य किया गया. नाइट शिफ्ट की टाइमिंग भी रात 12 से सुबह 6 बजे तक कर दी गई, पहले ये 5 बजे तक थी.

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इन नियम को लागू करने का असर ये हुआ कि इंडिगो एयरलाइंस के पायलट और Crew की संख्या अचानक कम हो गई. इससे फ्लाइट शेड्यूल बिगड़ गया जिससे स्थिति खराब हो गई. DGCA के नियम सभी एयरलाइन कंपनियों के लिए थे और सभी ने धीरे धीरे इन नियमों को अपनाया. लेकिन इंडिगो में अव्यवस्था इसलिए फैली क्योंकि ये भारत की सबसे ज्यादा उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइन कंपनी है.

देश में सबसे ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट करती है इंडिगो

बता दें कि Indigo एयरलाइंस प्रतिदिन 2300 उड़ानें संचालित करती है. ये एयर इंडिया की उड़ानों से करीब दोगुनी है. घरेलू उड़ानों में Indigo का मार्केट शेयर 64 प्रतिशत है. और दूसरी बड़ी एयरलाइन कंपनी 'एयर इंडिया' का मार्केट शेयर 27 प्रतिशत है. एक तरह से देखा जाए तो घरेलू मार्केट में इंडिगो एयरलाइंस का ही वर्चस्व है.

दिक्कत ये आई कि Indigo के पास उड़ानों को संचालित करने के लिए जितने पायलट और फ्लाइट स्टाफ थे, वो नए नियमों को लागू करने के बाद कम पड़ गए. Indigo ने नियमों को लागू तो कर दिया, लेकिन ये नहीं सोचा कि कितने ज्यादा पायलट और अन्य स्टाफ की जरूरत पड़ने वाली है. योजना बनाने में हुई इस लापरवाही की वजह से हवाई यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी. 

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(रिपोर्ट- करिश्मा असूदानी)

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