ओमान के पास हार्मुज में एक तेल टैंकर पर अमेरिकी हमले में कुल तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है. एक हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से था, दूसरा उत्तर प्रदेश के देवरिया से. दोनों के परिवार शव वापस लाने और जांच की मांग कर रहे हैं. तीसरे की पहचान अभी नहीं हुई है.
ओमान के पास समुद्र में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी चल रही थी. इसी दौरान एक तेल के टैंकर जहाज पर हमला हुआ. इस हमले में तीन भारतीयों की जान चली गई. एक हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले का 23 साल का आदित्य शर्मा था, और दूसरा उत्तर प्रदेश के देवरिया का 36 साल का शिवानंद चौरसिया था. दोनों के परिवारों को जब यह खबर मिली तो घर में मातम फैल गया.
हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा की कहानी
आदित्य शर्मा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में गलोड़ इलाके के हरेटा गांव का रहने वाला था. उम्र सिर्फ 23 साल थी. वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था.
जब जहाज पर हमला हुआ, तब आदित्य जल्द ही घर लौटने वाला था. उसके पिता राजेश शर्मा का कहना है कि बेटा जल्द घर आने वाला था, लेकिन अब यह खबर मिली तो दिल टूट गया. राजेश शर्मा ने भारत सरकार और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर से मांग की है कि बेटे का शव जल्द से जल्द गांव लाया जाए. साथ ही यह भी जांचा जाए कि आखिरी वक्त में क्या हुआ था.
आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल ने बताया कि वह 24 साल का इकलौता बेटा था. उन्होंने मांग की है कि जब जहाज पर हमला हुआ, उस वक्त आदित्य क्या कर रहा था, यह जानकारी परिवार को दी जाए. साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खू और सांसद अनुराग ठाकुर से कहा है कि शव जल्द भेजा जाए.
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आदित्य के दादा अशोक कुमार ने कहा कि उनका एक ही पोता था. उन्होंने मांग की है कि जहाज के कप्तान को आगे जाने की परमिशन किसने दी, इसकी जांच भी हो और जो भी दोषी हो उसे बख्शा न जाए. गांव में जैसे ही खबर फैली, सभी लोग आदित्य के घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश की.
उत्तर प्रदेश के शिवानंद चौरसिया की कहानी
शिवानंद चौरसिया उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव के रहने वाले थे. उनकी उम्र 36 साल थी. वह अपने पिता रामजी चौरसिया के बड़े बेटे थे. घर में उनके दो बच्चे भी हैं, एक बेटी और एक बेटा, दोनों छोटे हैं.
शिवानंद करीब 6 महीने पहले फीटर की नौकरी के लिए मुंबई गए थे. वहां से जहाज के जरिए सिंगापुर गए और सिंगापुर से वापस लौट रहे थे. लौटते वक्त ही दो दिन पहले जहाज पर बमबारी हुई और उनकी मौत हो गई.
उनके पिता ने बताया कि 9 तारीख को आखिरी बार बात हुई थी. शिवानंद ने कहा था कि सब ठीक है, वे ओमान के पास हैं. यह बताते-बताते पिता रो पड़े. आज सुबह 9 बजे फोन आया और मौत की खबर मिली.
जब यह खबर आई तो शिवानंद की पत्नी सुशीला मायके में थीं. खबर सुनते ही वह ससुराल पहुंचीं और रो-रोकर बुरा हाल हो गया. पूरे परिवार में कोहराम मच गया.
गांव के लोगों ने बताया कि शिवानंद बहुत अच्छे इंसान थे. परिवार की मांग है कि सरकार शव वापस लाए, एक करोड़ रुपये मुआवजा दे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए. शिवानंद के छोटे भाई हाल ही में दुबई गए थे.
परिवारों की मांगें
दोनों परिवारों की एक जैसी मांगें हैं. पहली मांग यह है कि शव जल्द से जल्द भारत और अपने-अपने गांव लाया जाए. दूसरी मांग है कि जांच हो कि आखिर जहाज को उस खतरनाक इलाके में जाने की परमिशन किसने दी. तीसरी मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई हो. शिवानंद के परिवार ने इसके अलावा एक करोड़ रुपये मुआवजे और एक सदस्य को नौकरी की मांग भी की है.
अशोक राणा / राम प्रताप सिंह