'हम एकमात्र ऐसे देश जिसने अपने नाविक खोए', होर्मुज का रास्ता खोलने पर 35 देशों की बैठक में बोला भारत

ईरान वॉर की वजह से बंद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए वर्ल्ड कम्युनिटी सक्रिय हो गई है. इस बाबत ब्रिटेन ने दुनिया के 35 से ज्यादा बड़े देशों के साथ चर्चा की. इसमें भारत भी शामिल है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बार बार कह चुके हैं कि जिन देशों का व्यापार होर्मुज स्ट्रेट से होता है उन्हें इस खुलवाने के लिए पहल करनी चाहिए.

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होर्मुज स्ट्रेट ईरान जंग की वजह से बंद है. (File Photo: Reuters) होर्मुज स्ट्रेट ईरान जंग की वजह से बंद है. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:40 PM IST

होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए ब्रिटेन एक बड़ी पहल कर रहा है. इस पहल में ब्रिटिश पीएम कीर स्टॉर्मर ने भारत को भी पार्टनर बनाया है और बातचीत के लिए भारत को न्योता दिया है. इस बातचीत में दुनिया के 40 बड़े देश शामिल हुए हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि इस मीटिंग में भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी वर्चुअली शामिल हुए हैं.

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समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, मीटिंग में मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इस संकट के असर की बात रखी. साथ ही इस बात  पर जोर दिया कि मिडिल ईस्ट में मर्चेंट शिप्स पर हुए हमलों में अपने नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है.

ब्रिटेन का होर्मुज समिट दरअसल एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय बैठक थी, जिसे पीएम कीर स्टॉर्मर की सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए शुरू किया है. ईरान वॉर शुरू होने के कुछ ही दिन बाद ईरान की सेना IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद अथवा नियंत्रित कर दिया है. इससे भारत, चीन, जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया समेत कई देशों की पेट्रोल-डीजल सप्लाई प्रभावित हुई है. 

इसके बाद इस मार्ग को खुलवाने के लिए ब्रिटिश पीएम ने पहल की है. यह समिट पश्चिम एशिया युद्ध के बीच उस समय हुई, जब दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक लगभग ठप हो चुका है और सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं. 

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दरअसल होर्मुज समिट डिप्लोमैटिक-मैरिटाइम कोऑर्डिनेशन प्लेटफॉर्म है. इसमें करीब 30–35 देश मिलकर तीन बड़े मुद्दों पर रणनीति बना रहे हैं.

होर्मुज स्ट्रेट में बेरोट-टोक जहाजों की आवाजाही बहाल करना.
फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
ग्लोबल तेल-गैस सप्लाई चेन को फिर से चालू करना

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इस बैठक की अगुवाई की. इस बैठक के पहले चरण में डिप्लोमैटिक और राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा की गई. 

बैठक के बाद ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि ईरान "एक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग को हाईजैक करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने में कामयाब रहा है. 

ईरान से लगातार संपर्क में भारत 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने होर्मुज से जुड़ी भारत की चिंताओं पर कहा कि, "हम ईरान और वहां के अन्य देशों के संपर्क में हैं, ताकि यह देखा जा सके कि हम अपने जहाजों के लिए बिना किसी रुकावट के और सुरक्षित आवागमन कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं. इन जहाज़ों में LPG, LNG और अन्य उत्पाद शामिल हैं. पिछले कुछ दिनों में हुई बातचीत के ज़रिए, हमारे 6 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार करने में सफल रहे हैं, और हम संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं."

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होर्मुज से पीछा छुड़ा रहे हैं ट्रंप

ईरान वॉर लड़ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार बार कहा है कि NATO समेत अन्य देशों को होर्मुज को मुक्त कराने के लिए आगे आना चाहिए. ट्रंप ने होर्मुज खुलवाने के लिए ब्रिटिश पीएम से अपनी नेवी भेजने को भी कहा था. लेकिन ब्रिटिश पीएम इसके लिए राजी नहीं हुए थे. इसके बाद ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम की तीखी आलोचना की थी. 

सैन्य ऑपरेशन विकल्प नहीं

इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को कहा कि फ्रांस होर्मुज स्ट्रेट को किसी सैन्य अभियान के ज़रिए फिर से खोलने को हकीकत से परे मानता है. 

दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मैक्रों ने ट्रंप का नाम लिए बिना निशाना साधा और कहा, "कुछ लोग होर्मुज स्ट्रेट को बलपूर्वक, यानी किसी सैन्य अभियान के ज़रिए फिर से खोलने के विचार का समर्थन करते हैं; यह एक ऐसा रुख है जिसे कभी-कभी अमेरिका ने भी जाहिर किया है." उन्होंने आगे कहा, "हमने कभी भी इस विकल्प को नहीं चुना है, और हम इसे अवास्तविक मानते हैं."

मैक्रों ने कहा कि एक सैन्य अभियान में "असीमित समय लगेगा और इससे स्ट्रेट से गुजरने वाला कोई भी व्यक्ति ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से होने वाले हमले की चपेट में आ जाएगा; क्योंकि उनके पास हथियार, बैलिस्टिक मिसाइलें और कई अन्य तरह के अस्त्र-शस्त्र मौजूद हैं."

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मैक्रों ने कहा कि जलडमरूमध्य को फिर से खोलना केवल ईरान के साथ समन्वय से ही संभव है, और यह ऐसा वार्ताओं के ज़रिए किया जा सकता है.

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