14 साल के मासूम में धड़केगा फौजी की पत्नी का दिल, अंगदान से मिली नई जिंदगी

नई दिल्ली में 14 साल के एक बच्चे को 41 वर्षीय ब्रेन डेड महिला का दिल लगाकर नई जिंदगी दी गई. महिला के परिवार ने अंगदान का फैसला लिया, जिससे यह संभव हो सका. बच्चा लंबे समय से दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था. हार्ट को चंडीगढ़ से दिल्ली तक दिल पहुंचाने के लिए चार्टर्ड विमान और ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया.

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हार्ट ट्रांसप्लांट से 14 साल के लड़के की जान बच गई. (Photo/ApolloHospitals) हार्ट ट्रांसप्लांट से 14 साल के लड़के की जान बच गई. (Photo/ApolloHospitals)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

नई दिल्ली में एक 14 साल के बच्चे को नई जिंदगी मिली है. यह चमत्कार संभव हुआ एक सेना अधिकारी की पत्नी के परिवार के फैसले से, जिन्होंने अपने गहरे दुख के बीच अंगदान का रास्ता चुना. इस मानवीय निर्णय ने न सिर्फ एक बच्चे की जान बचाई, बल्कि कई और लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाई.

जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के पंचकूला स्थित कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर में 41 वर्षीय महिला को गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती कराया गया था. तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और 2 मई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. इसके बाद उनके पति, जो भारतीय सेना में सेवारत अधिकारी हैं, और उनकी दो बेटियों ने बेहद साहसिक फैसला लेते हुए अंगदान की सहमति दी.

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एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर से जूझ रहा था बच्चा
महिला का हार्ट नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती 14 वर्षीय बच्चे के काम आया. यह बच्चा पिछले एक साल से एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर से जूझ रहा था. उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और उसे लगभग हर महीने अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था. डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी जान बचाने का एकमात्र रास्ता हार्ट ट्रांसप्लांट था.

जैसे ही महिला का हार्ट उपलब्ध हुआ, अपोलो अस्पताल की विशेष टीम तुरंत चंडीगढ़ पहुंची. इसके लिए निजी चार्टर्ड विमान की व्यवस्था की गई. समय बेहद महत्वपूर्ण था, इसलिए पूरे अभियान को तेजी से अंजाम दिया गया. हार्ट को सुरक्षित तरीके से दिल्ली लाया गया. 

एयरपोर्ट से 20 मिनट में अस्पताल पहुंचा हार्ट
चंडीगढ़ और हरियाणा-पंजाब की यातायात पुलिस ने इसमें मदद की. वहीं एयरपोर्ट प्राधिकरण ने उड़ान को प्राथमिकता दी. दिल्ली पहुंचने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट से अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे अंग सिर्फ 20 मिनट में अस्पताल पहुंच गया. इसके बाद सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया. फिलहाल बच्चा स्थिर है और आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में है.

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अस्पताल ने इस पूरी प्रक्रिया में कमांड अस्पताल के कर्नल अनुराग गर्ग की भूमिका की भी सराहना की. वहीं डॉक्टर मुकेश गोयल ने बताया कि बच्चे का नाम राष्ट्रीय अंग एवं टिशु ट्रांसप्लांट संगठन में दो महीने पहले दर्ज कराया गया था. सही समय पर मिला यह ऑर्गन उसके लिए नई जिंदगी लेकर आया.

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