डीजल और ATF पर स्पेशल ड्यूटी क्यों बढ़ाई गई? सरकार ने बताए 2 कारण

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी है और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौता पूरी तरह से होने की उम्मीद है.

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डीजल और एटीएफ पर स्पेशल ड्यूटी बढ़. (Photo: PTI) डीजल और एटीएफ पर स्पेशल ड्यूटी बढ़. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:45 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच भले ही शांति समझौता हो गया हो लेकिन हालात सुधरने में अभी काफी लंबा वक्त लग सकता है. ऐसे में सरकार ने सोमवार देर रात डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) बढ़ा दी है, जिसे आमतौर पर 'विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स' कहा जाता है. 

सरकार ने ये फैसला दो बातों को ध्यान में रखते हुए लिया है. पहला- लोकल सप्लाई पर कोई संकट न हो और दूसरा- ग्लोबल एनर्जी मार्केट से होने वाले मुनाफे का फायदा एक्सपोर्टर न उठा सकें.

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कितनी बढ़ गई SAED?

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर SAED को मौजूदा 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.

हालांकि, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह 1.5 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है. नई दरें 16 जून से लागू हो चुकी हैं.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी है और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौता पूरी तरह से होने की उम्मीद है.

सरकार ने यह भी साफ किया कि घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसका मतलब है कि रिटेल ग्राहकों पर इस ताजा बदलाव का कोई तुरंत असर पड़ने की संभावना नहीं है.

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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद 26 मार्च को विंडफॉल टैक्स सिस्टम को फिर से लागू किया गया था. तब से सरकार अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव के आधार पर हर दो हफ्ते में एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा और उसमें बदलाव करती रही है. 16 मई को सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी यह लेवी (टैक्स) लागू कर दी थी.

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

अधिकारियों ने कहा कि एक्सपोर्ट ड्यूटी इसलिए लगाई गई ताकि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे, खासकर ऐसे समय में जब जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई हैं. इस कदम का मकसद उन रिफाइनरों के जरिए बहुत ज्यादा एक्सपोर्ट को रोकना है जो इंटरनेशनल मार्केट में ऊंची कीमतों का फायदा उठाना चाहते हैं, ताकि घरेलू फ्यूल सप्लाई सुरक्षित रहे.

सरकार का कहना है कि विंडफॉल टैक्स सिस्टम एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उछाल के दौरान घरेलू और विदेशी मार्केट के बीच कीमतों के अंतर का गलत फायदा उठाने से रोकने में मदद करता है.

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि भले ही डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ने से रिफाइनरों के एक्सपोर्ट मुनाफे पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन इस कदम का मकसद घरेलू एनर्जी सिक्योरिटी को प्राथमिकता देना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग हब में से एक है और इंटरनेशनल मार्केट में बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का एक्सपोर्ट करता है.

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